जरुरी जानकारी | पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 1,124 मेगावाट क्षमता की बिजली परियोजना लगाएगा चीन

इस्लामाबाद, दो जून भारत की आपत्ति के बावजूद चीन अरबों डॉलर की सीपीईसी (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) परियोजना के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 1,124 मेगावट क्षमता की बिजली परियोजना लगाएगा। मंगलवार को एक मीडिया रिपोर्ट में यह कहा गया है।

ऊर्जा मंत्री अयूब की अध्यक्षता में ‘प्राइवेट पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (पीपीआईबी) की सोमवार को 127वीं बैठक में कोहाला पनबिजली परियोजना का ब्योरा पेश किया गया।

यह भी पढ़े | Monsoon 2020: केरल में झमाझम बारिश, पूरे देश के लिए भी अच्छी खबर, जानें मानसून की बड़ी अपडेट.

अंग्रेजी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार सीपीईसी के तहत 1,124 मेगावाट क्षमता की कोहाला पनबिजली परियोजना स्थापित करने के लिये चीन के थ्री गोर्ज कॉरपोरेशन, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के प्राधिकरण और पीपीआईबी के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ।

यह परियोजना झेलम नदी पर स्थापित की जाएगी और इसके बनने से पाकिस्तान के उपभोक्ताओं को 5 अरब यूनिट से अधिक सस्ती और स्वच्छ बिजली मिलेगी।

यह भी पढ़े | Mann Ki Baat Highlights: पीएम मोदी ने कहा, अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खुला, अब ज्यादा सावधानी की जरूरत.

कुल 3,000 किलोमीटर लंबी सीपीईसी का मकसद चीन और पाकिस्तान को सड़क, रेल, पाइपलाइन और आप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ना है। यह चीन के शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। इससे चीन को सीधे अरब सागर तक पहुंच मिल जायेगी।

सीपीईसी पीओके से होकर गुजरता है जिसको लेकर भारत ने अपना विरोध चीन के समक्ष जताया है।

पिछले महीने भारत ने गिलगिट-बाल्टिस्तान मे बांध बनाने की बड़ी परियोजना का ठेका दिये जाने को लेकर पाकिस्तान के समक्ष विरोध जताया था। भारत का कहना था कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में इस प्रकार की परियोजना ठीक नहीं है।

पाकिस्तान सरकार ने चीन की सरकारी कंपनी और पाकिस्तान सेना की वाणिज्यिक इकाई के साथ 442 अरब डॉलर का अनुबंध किया है। यह अनुबंध डैमर- बांध के लिये है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)