बीजिंग, तीन मार्च चीन ने 2020 में भारतीय सैनिकों के साथ गलवान घाटी में सीमा पर हुई झड़प में घायल हुए सेना के एक रेजिमेंट कमांडर को राष्ट्रीय सलाहकार निकाय चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (सीपीपीसीसी) का विशिष्ट सदस्य बनाकर सम्मानित किया है।
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने ‘सीपीपीसीसी डेली’ के हवाले से बताया है कि रविवार को बीजिंग में आयोजित एक समारोह में सीपीपीसीसी सदस्यों के लिए 2024 के उत्कृष्ट प्रदर्शन पुरस्कार से सम्मानित 33 लोगों में क्यूई फबाओ भी शामिल थे।
वर्ष 2022 में, क्यूई को शीतकालीन ओलंपिक के लिए मशालवाहक बनाया गया, जिसके कारण भारतीय राजनयिकों ने इस आयोजन के उद्घाटन और समापन समारोहों का बहिष्कार किया था।
खबर के अनुसार, इससे पहले क्यूई को केंद्रीय सैन्य आयोग द्वारा ‘‘सीमा की रक्षा के लिए हीरो रेजिमेंटल कमांडर’’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था और 2021 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना सेंट्रल कमेटी द्वारा मेडल से सम्मानित किया गया था।
जनवरी 2023 में, क्यूई को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया और सीपीपीसीसी की 14वीं राष्ट्रीय समिति के सदस्यों की सूची की घोषणा के बाद वह सीपीपीसीसी के सदस्य बन गए।
चीन ने गलवान संघर्ष के आठ महीने बाद अपने चार सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की थी। इस झड़प में कुल 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। इसे भारत-चीन सीमा पर चार दशकों में सबसे भीषण झड़प माना जाता है।
भारत ने घटना के तुरंत बाद हताहतों की संख्या की घोषणा की, जबकि चीन ने आठ महीने बाद अपने हताहतों की संख्या बताई।
गलवान झड़प और पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद दोनों देशों के बीच चार साल से ज़्यादा समय तक रिश्तों में तनाव रहा। पिछले साल अक्टूबर में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच मुलाक़ात के बाद दोनों देशों के रिश्ते फिर से बहाल हुए।
इसके बाद कई बैठकें हुईं, जिनमें सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी की बैठक और विदेश सचिव स्तर की वार्ता शामिल थी।
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