देश की खबरें | आपदा जोखिम में कमी लाने के नीतिगत ढांचों में बच्चों को प्राथमिकता मिले: एनजीओ
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नयी दिल्ली, पांच जून बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘सेव द चिल्ड्रन’ ने आपदा जोखिम में कमी लाने के प्रयासों में बच्चों को प्राथमिकता देने और बच्चों को शामिल करने तथा इससे जुड़े कार्यक्रमों एवं नीतिगत ढांचों को और मजबूत करने के लिए में उसमें बाल संवेदनशीलता को शामिल करने का आह्वान किया है।

एनजीओ ने कुछ ऐसे क्षेत्रों को रेखांकित किया जिन्हें प्राथमिकता दिये जाने की जरूरत है और जिनकी पहचान खुद बच्चों द्वारा की गई है।

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एनजीओ ने यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया है कि स्कूल सुरक्षित रहें ताकि शिक्षा बाधित न हो। साथ ही आपदा के पहले और बाद में बाल संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। सामुदायिक बुनियादी ढांचे को सुरक्षित बनाया जाए और राहत एवं पुनर्निर्माण कार्य में भविष्य के जोखिम को कम किया जाए।

उसने कहा, ‘‘सेव द चिल्ड्रेन सरकारों, दान दाताओं और एजेंसियों से इसके लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता का आह्वान दोहराता है कि वे जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन से संबंधित कार्यक्रमों में बच्चों के अर्थपूर्ण जुड़ाव के लिए उचित मंच मुहैया करायें। साथ ही कार्यक्रमों और नीतिगत रूपरेखाओं में मजबूती लाने के लिए उसमें बाल संवेदनशीलता लायें।’’

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बयान में कहा बयान में कहा गया है, ‘‘भारत का 68 फीसदी भूभाग सूखे, 60 फीसदी भूकंप, 12 फीसदी बाढ़ और आठ फीसदी में चक्रवात का जोखिम है। भारत दुनिया के सबसे अधिक आपदाग्रस्त देशों में से एक है, जिससे कुल मिलाकर 85 फीसदी भारतीय भूभाग और पांच करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं।’’

सेव द चिल्ड्रेन की सीईओ बिदिशा पिल्लई ने कहा, ‘‘हम एक अभूतपूर्व समय का अनुभव कर रहे हैं। व्यक्तियों, संगठनों, समुदायों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से बच्चों के रूप में हमारी सहनशक्ति को लगातार चुनौती मिल रही है और इसके लिए नए समाधान एवं रचनात्मक सोच की लगातार मांग उत्पन्न हो रही है।’’

पिल्लई ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के क्षेत्र में बच्चों के दृष्टिकोण को कुल मिलाकर कम प्रतिनिधित्व मिला है। बच्चों की ज़रूरतों, आवाज और क्षमताओं को अनुकूलन प्रयासों में एकीकृत किया जाना चाहिए क्योंकि इससे दीर्घकालिक और अधिक मजबूत समुदाय और संस्थागत ढांचे की स्थापना होगी।

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