नयी दिल्ली, 11 जून बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ‘चाइल्ड राइट्स एंड यू’ (क्राई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोरोना वायरस संकट के बाद घरों से चल रहे कामकाजों, कृषि और जोखिम भरे पेशों में बाल श्रम में बढ़ोतरी हो सकती है।
गैर सरकारी संगठन क्राई ने कहा कि परिवार में उपजी आर्थिक तंगी की भरपाई करने के लिए बच्चों को अकुशल श्रम में धकेले जाने की आशंका है। ऐसी आशंका है कि जिन घरों में भी पैसे को लेकर परेशानियां होंगी, वहां बच्चे पढ़ाई के बदले अपने घर की मदद करने के लिए काम को चुन सकते हैं।
इसके लिए क्राई ने इंटरनेट के माध्यम से ई-परामर्श किया जिसका मकसद यह रेखांकित करना था कि कोविड-19 महामारी का असर भारत में बाल और किशोर श्रम की स्थिति पर किस तरह से पड़ेगा।
इस विषय पर विचार-विमर्श किया गया कि हाल में कुछ राज्यों में श्रम कानूनों में रियायत का असर किशोर श्रम पर किस तरह से पड़ेगा। इसके साथ ही इस पर भी बातचीत हुई कि कैसे साथ मिलकर नागरिक संस्थाएं और राज्य बाल श्रम के अभिशाप के खिलाफ लड़ सकते हैं।
विशेषज्ञों के पैनल की अध्यक्षता बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो कर रहे थे। इसमें टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान के श्रम अध्ययन केंद्र के सहायक प्रोफेसर राहुल सप्कल, अनुसंधान, बजट और शासन जवाबदेही केंद्र की अतिरिक्त समन्वयक प्रोतिवा कुंडू समेत अन्य लोग शामिल थे।
कानूनगो ने कहा कि बाल श्रम की समस्या को दूर करने के लिए मौजूदा कानूनों का इस्तेमाल प्रभावी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक इस संबंध में जितनी प्राथमिकियां दर्ज हुई हैं, उसे देश में बाल श्रमिकों की संख्या को देखते हुए मिलाया जाय तो वह बेहद कम है। इसलिए यह सभी की जिम्मेदारी है कि वह बाल श्रमिक के बारे में बताएं और प्राथमिकी दर्ज कराएं।
गैर सरकारी संगठन ने बाल श्रम कानून को कड़ाई से लागू करने की सिफारिश की है। संगठन ने कहा कि सरकार को सामाजिक दूरी और अन्य नियमों का ध्यान रखेत हुए कक्षाओं की भरपाई करने के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र खोलने चाहिए।
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