अमरावती, दो जुलाई आंध्र प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज होने के बीच वाईएसआरसीपी प्रमुख एवं मुख्यमंत्री वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी ने तेदेपा अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू और जनसेना के नेता पवन कल्याण पर हमला करते हुए दावा किया कि विपक्ष राज्य की जनता की भलाई के लिए किए जा कार्यों को पचा नहीं पा रहा है।
वहीं, तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) ने आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ ‘नलुगेल्ला नरकम’ (नरकीय चार साल) अभियान शुरू किया है, जिसके तहत सरकार की ‘‘विफलताओं’’ को उजागर करने का प्रयास किया जाएगा।
जगन मोहन रेड्डी ने 28 जून को ‘जगनन्ना अम्मा वोडी’ योजना के तहत 6,393 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता वितरित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान तेदेपा प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू, जनसेना के संस्थापक पवन कल्याण और मीडिया घरानों के एक वर्ग पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग जनता के लिए किए जा रहे अच्छे काम को पचा नहीं पा रहे हैं।
गौरतलब है कि अपने बच्चों को स्कूल भेजने वाली पात्र माताओं को ‘अम्मा वोडी’ योजना के तहत शैक्षिक खर्चों को पूरा करने के लिए 15,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।
जगन मोहन रेड्डी ने दावा किया कि नायडू ने तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद कोई भी अच्छा काम नहीं किया लेकिन चुनाव से पहले घोषणापत्र लाते हैं और बाद में उसे कूड़ेदान में फेंक देते हैं।
कल्याण पर निशाना साधते हुए रेड्डी ने कहा कि वह नायडू की विफलताओं पर सवाल खड़ा नहीं करते, बल्कि अपने विरोधियों को पीटने की धमकी देते हैं।
इस बीच, जनसेना के संस्थापक कल्याण ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जनता तक पहुंचने के लिए एक राजनीतिक यात्रा शुरू की है।
इस यात्रा के लिए विशेष तौर पर तैयार किए गए वाहन ‘वराही’ का उपयोग विभिन्न गांवों में भाषण देने के लिए किया जा रहा है।
इस बीच, मुख्य विपक्षी दल तेदेपा ने 27 जून को आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ ‘नलुगेल्ला नरकम’ (नरकीय चार साल) अभियान शुरू किया, जिसके तहत सरकार की ‘‘विफलताओं’’ को उजागर करने का प्रयास किया जाएगा।
अभियान के दौरान जनता को आंकड़ों के जरिये राज्य में कथित तौर पर बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बारे में बताया जाएगा।
गुंटूर कॉम्प्लेक्स, विजयवाड़ा के सरकारी अस्पतालों और ओंगोल रेलवे स्टेशन जैसी जगहों पर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें अपराध दर में कथित वृद्धि, पिछड़े वर्गों और महिलाओं पर हमलों पर प्रकाश डाला गया।
इनमें सहायता प्राप्त स्कूलों को बंद करना, किसानों की आत्महत्या, स्नातकोत्तर छात्रों को छात्रवृत्ति बंद करना और आरोग्यश्री योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं में कटौती जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया गया है।
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