श्रीनगर, 11 सितंबर अमेरिका से आयातित सेब, अखरोट और बादाम पर अतिरिक्त शुल्क हटाने के फैसले को लेकर सोमवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने केंद्र से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की।
अब्ब्दुला ने कहा कि सरकार को विदेशियों को खुश करने के बजाय अपने लोगों को खुश करने की कोशिश करनी चाहिए। उधर, महबूबा मुफ्ती ने केंद्र के इस कदम को जम्मू-कश्मीर के बागवानी उद्योग के लिए विनाशकारी बताया।
केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते सेब, अखरोट और बादाम जैसे अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क हटाने के अपने फैसले की घोषणा की थी।
अमेरिका द्वारा कुछ स्टील और एल्यूमीनियम वस्तुओं पर दर बढ़ाने के जवाबी उपाय के रूप में 2019 में अतिरिक्त शुल्क लगाए गए थे।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा, ‘‘मुझे समझ नहीं आता कि सरकार को अमेरिकियों और अन्य देशों के लोगों को खुश करने के लिए अपने लोगों को परेशानी में डालने की क्या जरूरत है। हमें लगा कि केंद्र पहले कश्मीर के लोगों के बारे में सोचेगा।’’
अब्दुल्ला ने पार्टी मुख्यालय पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर वे यहां के लोगों के बारे में नहीं सोचना चाहते, तो कम से कम उन्हें हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों के बारे में सोचना चाहिए था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। हम आयातित सेब, अखरोट और बादाम नहीं चाहते। हमारी उपज काफी अच्छी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगी और देश के सेब और अखरोट उत्पादकों को राहत देगी। इस फैसले का खामियाजा पहाड़ी राज्यों को उठाना पड़ेगा।’’
वहीं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘सेब, अखरोट और बादाम पर अतिरिक्त शुल्क हटाने के भारत सरकार के फैसले का जम्मू-कश्मीर में स्थानीय उत्पादकों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। यहां के लोग पहले से ही 2019 के बाद भारी घाटे से जूझ रहे हैं। आशा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस पर पुनर्विचार करेगा।’’
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