पटना, 25 नवंबर राष्ट्रीय सहकारिता नीति समिति के चेयरमैन सुरेश प्रभु ने शनिवार को कहा कि केंद्र प्रस्तावित नीति में शामिल करने के लिए राज्यों के सुझावों पर विचार करने को तैयार है।
पूर्व और उत्तर-पूर्व क्षेत्रों के लिए एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रभु ने कहा कि नई सहकारिता नीति 2023 को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार नई सहकारिता नीति 2023 में सभी हितधारकों (राज्यों) के बहुमूल्य सुझावों को शामिल करने के लिए तैयार है। केंद्र का उद्देश्य संरचनात्मक सुधार लाना, सहकारी समितियों को जीवंत आर्थिक संस्थाएं बनाना और उनके (सहकारिता) लिए समान अवसर प्रदान करना है।”
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसके अलावा, प्राथमिकता वाले वर्गों को शामिल करना, प्रौद्योगिकी का उपयोग, प्रशिक्षण और स्थिरता प्रस्तावित नीति के अन्य उद्देश्य हैं।
प्रभु ने कहा, “बिहार में सहकारी समितियों की काफी संभावनाएं हैं। वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और देश में सहकारी आंदोलन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।”
उन्होंने अधिकारियों को आश्वासन दिया कि मसौदा समिति ने राज्यों की स्वायत्तता और संघीय चरित्र की रक्षा में अत्यधिक सावधानी बरती है।
नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति का मसौदा तैयार करने के लिए समिति का गठन पिछले साल सितंबर में किया गया था।
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