नयी दिल्ली, 26 अप्रैल केंद्र ने 123 ‘वक्फ’ संपत्तियों को सूची से हटाने के खिलाफ दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा दायर याचिका का बुधवार को यहां उच्च न्यायालय के समक्ष विरोध किया और कहा कि बोर्ड की इनमें कोई हिस्सेदारी नहीं है। केंद्र ने कहा कि ये संपत्तियां 1911 और 1914 के बीच शुरू की गई भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही के अनुसार अधिग्रहित की गई थी और उसके पक्ष में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) किया था।
दिल्ली वक्फ बोर्ड ने केंद्र द्वारा उसकी 123 संपत्तियों को सूची से हटाने के फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
दिल्ली वक्फ बोर्ड ने दलील दी कि संपत्ति हमेशा उसके पास रही है और अदालत से इस स्तर पर अंतरिम उपाय के रूप में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देने का आग्रह किया।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने केंद्र सरकार के वकील और याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता को सुनने के बाद बोर्ड की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (एचयूए) के भूमि एवं विकास कार्यालय ने इस साल की शुरुआत में दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली वक्फ बोर्ड की मस्जिदों, दरगाह और कब्रिस्तान सहित 123 संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने का फैसला किया था।
विभाग ने आठ फरवरी को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्ला खान को लिखे एक पत्र में दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर 123 संपत्तियों से संबंधित सभी मामलों से दिल्ली वक्फ बोर्ड को मुक्त करने के फैसले के बारे में सूचित किया था।
आदेश को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में, केंद्र ने कहा कि 1911 और 1914 के बीच भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही के अनुसार सभी 123 संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया था, मुआवजा दिया गया था और कब्जा लिया गया था।
केंद्र ने यह भी दावा किया कि कब्जा हमेशा केंद्र के पास रहा है और इन अधिग्रहणों को अंतिम रूप दिया गया है और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए उपयोग किया गया है।
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