नयी दिल्ली, 16 जून मणिपुर में कई उपायों के जरिये सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किए गए हैं। सूत्रों ने शुक्रवार को यह बात कही।
सूत्रों ने बताया कि इन उपायों में सुरक्षा बलों द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों और अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कड़ी निगरानी शामिल है।
घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्थिति का आकलन करने और केंद्रीय बलों के बेहतर इस्तेमाल और समन्वय के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक एस. एल. थाउसेन को मणिपुर भेजा है।
उन्होंने कहा कि एक घटना में नौ युवकों के मारे जाने और केंद्रीय मंत्री राजकुमार रंजन सिंह के निजी आवास में आग लगा दिये जाने के बाद केंद्र सरकार ने मणिपुर में लगातार हो रही हिंसा को रोकने के लिए अत्यावश्यक कदम उठाये।
सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में, राज्य पुलिस बलों के अलावा मणिपुर में लगभग 30,000 केंद्रीय सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। इन बलों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की लगभग आठ बटालियन, सेना की 80 टुकड़ियां (कॉलम) और असम राइफल्स की 67 टुकड़ियां शामिल हैं।
सेना की दिमापुर स्थित 3 कोर ने कहा कि हिंसा की घटनाओं में हाल में हुई वृद्धि के बाद सेना और असम राइफल्स द्वारा एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
सूत्रों ने कहा कि जब भी राज्य प्रशासन की ओर से मांग की जाती है तो केंद्र सरकार नियमित रूप से अतिरिक्त बल भेजती है।
सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) ने आज शाम राज्यपाल अनुसुईया उइके से मुलाकात की और उन्हें वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने स्थानीय कमांडरों के साथ बंद कमरे में बैठकें भी की हैं ताकि सुरक्षा बलों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
केंद्र सरकार के शीर्ष पदाधिकारी भी स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और नियमित दिशा-निर्देश दे रहे हैं ताकि जल्द से जल्द सामान्य स्थिति को बहाल किया जा सके।
गौरतलब है कि मेइती समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद मणिपुर में हिंसक झड़पें हुई थीं।
जातीय हिंसा भड़कने के बाद से राज्य में अब तक लगभग 120 लोगों की मौत हो चुकी है और तीन हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पिछले महीने मणिपुर का दौरा किया था और राज्य में शांति बहाल करने के अपने प्रयासों के तहत विभिन्न वर्गों के लोगों से मुलाकात की थी।
केंद्र ने मणिपुर में हिंसा की जांच के लिए चार जून को गुवाहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया था।
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