कोलकाता, 10 जुलाई मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्य पुलिस और केंद्रीय बल आठ जुलाई के पंचायत चुनावों के दौरान मतदाताओं की सुरक्षा के लिए अपने कर्तव्य का पालन करने में विफल रहे।
सलीम ने सवाल उठाया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद सभी मतदान केंद्रों पर केंद्रीय बल क्यों तैनात नहीं किए गए।
उन्होंने कहा, "केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस ने मतदाताओं की सुरक्षा के लिए अपना कर्तव्य नहीं निभाया।"
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के उपमहानिरीक्षक एसएस गुलेरिया ने शनिवार को कहा था कि केंद्रीय बलों द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग से संवेदनशील बूथों की सूची मांगे जाने के बावजूद यह उपलबध नहीं कराई गई।
सलीम ने कहा कि चुनावी हिंसा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उपद्रवी भी मारे गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अपराधियों की मदद करने की उसकी राजनीति के कारण हुआ।
उन्होंने कहा, "अगर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की योजनाएं (धरातल पर) काम करतीं तो सत्तारूढ़ दल को मतदाताओं को डराने-धमकाने के लिए गुंडों की मदद लेने की कोई जरूरत नहीं होती।"
केंद्रीय एजेंसियों द्वारा टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी से पूछताछ किए जाने के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले की सराहना करते हुए सलीम ने कहा कि यह देखना होगा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कितनी जल्दी कार्रवाई करता है।
शीर्ष अदालत ने सोमवार को कथित पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में बनर्जी के खिलाफ सीबीआई और ईडी की जांच में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह मामले में जांच को बाधित नहीं कर सकती।
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