देश की खबरें | सीबीआई ने कथित भ्रष्ट गतिविधियों के लिए विश्व भारती के पूर्व कुलपति के खिलाफ मामला दर्ज किया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 23 सितम्बर केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने विश्व भारती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सुशांत दत्तगुप्ता के खिलाफ विश्वविद्यालय में कार्यकाल के दौरान कथित भ्रष्ट गतिविधियों के संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

उनके खिलाफ 2012 और 2013 के बीच लगाये गये आरोपों के सिलसिले में दो साल तक चली प्रारंभिक जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है।

यह भी पढ़े | Man Swallows Tooth Brush: दांत साफ करने के दौरान शख्स निगल गया ब्रश, निकालने के लिए करना पड़ा ऑपरेशन.

पंद्रह फरवरी, 2016 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की सिफारिश के आधार पर भौतिकीविद दत्तगुप्ता की बर्खास्तगी की मंजूरी दी थी। यह किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रमुख की बर्खास्तगी की पहली घटना था।

राष्ट्रपति विश्वभारती विश्वविद्यालय के विजिटर होते हैं। पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इस विश्वविद्यालय को स्थापित किया था।

यह भी पढ़े | IPL 2020: मुंबई इंडियंस ने कोलकाता नाइट राइडर्स को 49 रनों से हराया: 23 सितंबर 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को कथित वित्तीय अनियमितताओं, नियमों के उल्लंघन और पद के दुरूपयेाग से जुड़ी दत्तगुप्ता के खिलाफ तीन शिकायतें भेजी थीं।

अधिकारियों के मुताबिक सीवीसी ने शिक्षा मंत्रालय की एक समिति की रिपोर्ट भी संलग्न की थी। समिति ने आरोपों की जांच की थी।

सीवीसी से मामला भेजे जाने के बाद सीबीआई ने प्राथमिक जांच की। उससे प्रथम दृष्टया सामने आया कि कुलपति रहने के दौरान दत्तगुप्ता ने यह तथ्य छिपाया कि उन्हें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पेंशन भी मिल रही है, इस प्रकार उन्हें 13 लाख रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान प्राप्त हुआ।

उन्होंने बताया कि दत्तगुप्ता के खिलाफ यह भी आरोप है कि उन्होंने विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक निजी कानूनी फर्म की सेवा ली जिसने सरकार द्वारा अनुमोदित वकीलों से अधिक शुल्क लिया।

सीबीआई ने आरोप लगाया कि प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि दत्तगुप्ता ने विभागीय जांच करने के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को मानदेय के रूप में पांच लाख रुपये का भुगतान किया जो नियमों के खिलाफ था।

शिक्षा मंत्रालय ने मुखर्जी के पास फाईल भेजी थी और वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों को लेकर दत्तगुप्ता की बर्खास्तगी की सिफारिश की थी।

मुखर्जी ने दो बार यह कहते हुए फाईल लौटा दी थी कि क्या कुलपति को उनके विरूद्ध लगे आरोपों पर सफाई का मौका नहीं देना कानूनसम्मत है। लेकिन जब कानून मंत्रालय ने शिक्षा मंत्रालय के दृष्टिकोण का समर्थन किया और फाईल फिर राष्ट्रपति के पास भेजी गयी तब दत्तगुप्ता की बर्खास्तगी का मार्ग साफ हो गया।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)