नयी दिल्ली, 29 मई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने तकनीकी सहायता की आड़ में जापानी नागरिकों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में छह व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है और दो अवैध कॉल सेंटर बंद करा दिये हैं। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
धोखाधड़ी करने वालों ने माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल के प्रतिनिधि बनकर पीड़ितों से 2.03 करोड़ जापानी येन से अधिक की ठगी की।
ऑपरेशन ‘चक्र पांच’ के तहत सीबीआई ने अपराधियों और उनके स्थानों का पता लगाने और उनकी पहचान करने के लिए जापान की राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी और माइक्रोसॉफ्ट के साथ मिलकर काम किया। यह अभियान साइबर अपराध पर जारी राष्ट्रव्यापी कार्रवाई का हिस्सा है।
सीबीआई ने एक बयान में कहा, ‘‘यह सहयोगात्मक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी अपराधियों की पहचान करने और सिंडिकेट के संचालन ढांचे का पता लगाने में महत्वपूर्ण साबित हुई, जिसके परिणामस्वरूप अंततः भारत में सफल कार्रवाई हुई।’’
बयान में कहा गया कि सिंडिकेट के संचालन ठिकानों की पहचान करने के बाद, सीबीआई के दलों ने बुधवार को दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 19 जगहों पर समन्वित छापे मारे।
बयान में कहा गया कि इन छापों के परिणामस्वरूप छह संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई और वैध ग्राहक सहायता केंद्रों के रूप में चल रहे दो कॉल सेंटर बंद करा दिये गए।
बयान में कहा गया कि गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान दिल्ली के आशु सिंह, पानीपत के कपिल घाखर, अयोध्या के रोहित मौर्य और वाराणसी के शुभम जायसवाल, विवेक राज और आदर्श कुमार के रूप में हुई।
सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, ‘‘सिंडिकेट ने वैध ग्राहक सेवा केंद्रों के रूप में दिखने वाले कॉल सेंटर संचालित किए, जिनके माध्यम से पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से छेड़छाड़ की गई है।"
उन्होंने कहा कि इस बहाने पीड़ितों को धनराशि फर्जी खातों में अंतरित करने के लिए मजबूर किया जाता था।
बयान में कहा गया है कि सीबीआई को अप्रैल से जुलाई 2024 के बीच, चार विशिष्ट घटनाओं के बारे में जानकारी मिली, जिसमें जापानी नागरिकों को एक ही तरीके से निशाना बनाया गया था। बयान में कहा गया है कि उनके कंप्यूटर पर एक पॉप-अप अलर्ट आता था, जिसमें वायरस का झूठा दावा किया जाता था और उन्हें दिए गए फ़ोन नंबर पर संपर्क करने का निर्देश दिया जाता था।
बयान में कहा गया है कि घबराहट की स्थिति में, पीड़ित नंबर डायल करते थे, लेकिन वे भारत में बैठे धोखाधड़ी करने वालों से जुड़ जाते थे, जो खुद को माइक्रोसॉफ्ट या एप्पल के प्रतिनिधि बताते थे।
बयान में कहा गया है कि धोखेबाज पीड़ितों को धोखा देने के लिए कई तरह की भ्रामक तकनीक अपनाते थे, जिसमें उनके कंप्यूटर और बैंक खातों तक रिमोट एक्सेस प्राप्त करना और पैसे निकालने के लिए नकली उपहार कार्ड भेजना शामिल था।
सीबीआई की प्राथमिकी में कहा गया है, ‘‘धोखाधड़ी वाले पॉप-अप में इस्तेमाल दुर्भावनापूर्ण यूआरएल और होस्टिंग प्लेटफॉर्म की सदस्यता लेने के लिए इस्तेमाल किए गए आईपी पते के विश्लेषण के आधार पर उनका पता भारत में चला।’’
बयान में कहा गया है कि विश्लेषण से दिल्ली के दो व्यक्तियों - सेक्टर 5, आरके पुरम के मनमीत सिंह बसरा और यूजीएफ छतरपुर एन्क्लेव के जितेन हरचंद घोटाले के मुख्य संचालक के रूप में इंगित हुए।
बयान के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर टारगेट लीड जनरेशन का प्रबंधन किया और घोटाले के संचालकों के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचा प्रदान करते हुए भुगतान की सुविधा प्रदान की। इसके अनुसार हरचंद कथित तौर पर धनराशि को चैनलाइज करने के लिए भी जिम्मेदार था और धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए कई स्काइप आईडी से जुड़ा था।
बयान में कहा गया है कि जुलाई और दिसंबर 2024 के बीच, भारतीय आईपी पतों से जुड़े एक ही डिवाइस के माध्यम से संचालित होने वाले 94 दुर्भावनापूर्ण यूआरएल पाए गए। बयान में कहा गया है कि इन यूआरएल ने अनजान पीड़ितों को फंसाने के लिए जापानी में पॉप-अप संदेश उत्पन्न किए।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY