जरुरी जानकारी | केमैन आईलैंड भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का तेजी से उभरता स्रोत

नयी दिल्ली, नौ जून सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में केमैन आइलैंड भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की दृष्टि से पांचवा सबसे बड़ा निवेशक बन के उभरा।

औद्योगिक एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अनुसार वर्ष के दौरान वहां से 3.7 अरब डालर का निवेश प्राप्त हुआ हो एक साल पहले की तुलना में करीब तीन गुना है। 2018-19 वहां से एक अरब डालर और 2017-18 में 1.23 अरब डालर का एफडीआई प्राप्त हुआ था।

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केमैन आईलैंड ब्रिटेन के आधिपत्य वाला बाहरी क्षेत्र है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इसी तरह साइप्रस से 2019-20 में एफडीआई तीन गुना हो 87.9 करोड़ डालर के बराबर रहा। एक साल पहले वहां से 29.6 करोड़ डालर और 2017-18 में 41.7 करोड़ डालर की पूंजी आयी थी।

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विशेषज्ञ काफी समस से कहते आ रहे हैं कि निवेशक भारत में पूंजी निवेश करने के लिए केमैन आईलैंड के रास्ते को ज्यादा अपनाने लगे हैं क्योंकि वहां आयकर नहीं लगता। इसलिए भारत में एफडीआई के स्रोत के रूप में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे विकसित देश पिछड़ रहे हैं।

नांगिया एंड कंपनी एलएलपी के भागीदार निश्चल अरोड़ा ने कहा कि जिस तरह से केमैन आइलैंड से साल दर साल भारत में एफडीआई तीन तीन गुना बढ़ रहा है व प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में भारत के प्रति निवशकों के आकर्षण का सूचक होने के बजाय यह दर्शाता है कि निवेशकों के लिए बीच के एक पड़ाव के रूप में करचोरों की पनाहगाह माने जाने वाला यह छोटे आकार का द्वीपीय क्षेत्र कितना अधिक आकर्षक बनता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वहां निवेश पूंजी पारदर्शिता की कमी को देखते हुए वहां से पूंजी का तेजी से आना भारतीय विनियामकों के लिए चिंता पैदा कर सकता है। साइप्रस के बारे में उन्होंने कहा कि संभवत: यूरोप में सबसे कम कर की दर वाला देश होने के नाते वहां पूंजी रख कर निवेश करना ज्यादा फायदे का तरीका लगता हो।

वर्ष 2019-20 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 13 प्रतिशत बढ़ कर 50 अरब डालर रहा। इसमें सर्वाधिक निवेश क्रमश: सिंगापुर मारीशस, नीदरलैंड्स और अमेरिका से आया।

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