देश की खबरें | पीएमएलए के तहत दर्ज मामले दोहरे मुकदमे के जैसे : विशेष अदालत

मुंबई, 17 फरवरी मुंबई की एक विशेष अदालत ने उन दो आरोपियों को जमानत दे दी है, जिनके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया गया था, लेकिन कभी गिरफ्तार नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि पीएमएलए के तहत दर्ज मामले मूल रूप से ‘दोहरे मुकदमे’ की तरह हैं और इसलिए इनके जल्द निपटारे की ‘कोई उम्मीद नहीं है।’

अदालत ने यह भी कहा कि पीएमएलए के तहत अब तक ‘एक भी मामला’ निर्णय के माध्यम से नहीं निपटाया गया है।

विशेष न्यायाधीश एमजी देशपांडे ने धन शोधन मामले के आरोपी प्रमोद दवे और दिनेश बांगर की जमानत अर्जी 15 फरवरी को स्वीकार कर ली थी, लेकिन इस संबंध में एक विस्तृत आदेश 16 फरवरी को उपलब्ध कराया गया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीते साल दोनों के खिलाफ धन शोधन का मामला दर्ज किया था, लेकिन उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अगर ईडी को इतने गंभीर अपराध में आरोपी की संलिप्तता का पता चलता तो वह उसे गिरफ्तार कर लेता, लेकिन जांच एजेंसी ने ऐसा नहीं किया।

न्यायमूर्ति दवे ने कहा कि जब कोई आरोपी, जिसे जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया जाता है और शिकायत/आरोपपत्र दायर होने के बाद भी समन के जवाब में अदालत के समक्ष पेश होता है, अदालत को यह जांचना होगा कि क्या वह भविष्य में सुनवाई के लिए पेश होगा।

उन्होंने कहा, ‘मेरी राय में याचिकाकर्ता समाज में गहरी जड़ें रखते हैं। अदालत के सामने ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह संकेत मिलता हो कि उन्होंने फरार होने या अभियोजन पक्ष के सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया हो।’

विशेष अदालत ने कहा कि ‘शुरुआत से ही पीएमएलए के तहत दर्ज एक भी मामले का निपटारा निर्णय द्वारा नहीं किया गया है।’

अदालत ने कहा कि ‘पीएमएलए से जुड़े मामलों की सुनवाई करना मूल रूप से दोहरे मुकदमे की सुनवाई करने जैसा है, क्योंकि इस दौरान संबंधित मामले में अनुसूचित अपराधों पर एक साथ विचार करना पड़ता है।’

न्यायमूर्ति दवे ने कहा, ‘लिहाजा इस बात की कोई आशा नहीं है कि भविष्य में संबंधित मामले का अंतिम रूप से गुण-दोष के आधार पर जल्द से जल्द निस्तारण किया जा सकेगा।’

जमानत अर्जी पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए अगर याचिकाकर्ताओं, जिन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया है, को हिरासत में लिया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया तो यह उनके साथ अन्याय होगा।

पीएमएलए के दो हिस्से हैं-‘अनुसूचित अपराध’ और ‘धन शोधन का अपराध।’ अनुसूचित अपराधों में आपराधिक साजिश, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना या युद्ध छेड़ने का प्रयास करना या युद्ध छेड़ने के लिए उकसाना और सरकारी स्टांप की जालसाजी करना शामिल है।

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