देश की खबरें | जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द करने से न तो विकास ही हुआ न ही आतंकवाद खत्म हुआ : फारूक
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

जम्मू, दो अगस्त जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला ने रविवार को दावा किया कि भूतपूर्व राज्य का विशेष दर्जा समाप्त करने से न तो इसका विकास हुआ न ही आतंकवाद का खात्मा हुआ जैसा नयी दिल्ली में कुछ निहित स्वार्थों ने दावा किया था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान के अपहरण और उसके बाद पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर की रिहाई से कोई सबक नहीं लिया क्योंकि “उन्हें लगता है कि वे बुद्धिमानों से भी बुद्धिमान हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।”

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एपिलोग न्यूज नेटवर्क द्वारा आयोजित एक वेबिनार में, लोकसभा सदस्य एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार ने जम्मू-कश्मीर से किसी की भी राय लिए बिना विदेश दर्जा रद्द करने का फैसला लिया।

उन्होंने कहा, “यह एक दिन में राज्य सभा में पारित हुआ और दूसरे दिन लोकसभा में।” उन्होंने साथ ही कहा कि सरकार द्वारा कहा गया कि कश्मीर अब भारत का हिस्सा होगा।

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उन्होंने कहा, “हम तिरंगा थामे हुए हमेशा से भारत का हिस्सा थे।”

अब्दुल्ला ने वेबिनार में कहा कि जम्मू-कश्मीर विशेष राज्य के दर्जे का लाभ ले रहा थो जो मुस्लिम बहुल राज्य को मुस्लिम पाकिस्तान राष्ट्र को अस्वीकार कर हिंदू बहुलता वाले भारत में शामिल होने पर दिया गया था।

भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री प्रिया सेठी और पूर्व विधान पार्षद सुरिंदर अंबरदार ने अब्दुल्ला की बातों का विरोध किया और कहा कि समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करना आवश्यक हो गया था।

सेठी ने कहा, “लाभ का आकलन करने के लिए एक साल बहुत कम समय है, हमें कुछ वक्त दीजिए और आपको खुद परिणाम दिखेगा।”

अंबरदार ने कहा कि अनुच्छेद 370 दो राष्ट्र वाले सिद्धांत को जारी रखने वाला था जिसने 1947 में पाकिस्तान को जन्म दिया।

पिछले साल पांच अगस्त को, केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को प्रदत्त विशेष राज्य का दर्जा रद्द कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।

अब्दु्ल्ला ने कहा कि जिस विकास का वादा किया गया, वह नहीं हुआ और उन्होंने इस क्रम में कठुआ-बनिहाल रेल लिंक तथा करगिल और कश्मीर घाटी को जोड़ने वाली सुरंग का उदाहरण दिया। साथ ही उन्होंने कहा, “हम कभी भी अलगाववादी नहीं थे न ही अलगाववाद को बढ़ावा दिया।”

“क्या बदल गया था जिसने उन्हें ऐसा फैसला लेने पर मजबूर किया? इसे रद्द करना भाजपा का एजेंडा था और इसलिए उसने इसे इस तरह से पेश किया कि खूब विकास होगा, उद्योगपति आएंगे और पूरा खाका बदल जाएगा। हां, मानचित्र बदल गया क्योंकि महाराजा का कश्मीर रातभर में कहीं गायब हो गया और हम केंद्रशासित प्रदेश हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है। केंद्रशासित प्रदेश राज्य बनते हैं लेकिन राज्य कभी केंद्र शासित प्रदेश नहीं बनते।”

उन्होंने नेताओं को हिरासत में रखने पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, “कल्पना कीजिए कि तिरंगे की शान बनाए रखने के लिए मेरी पार्टी के मंत्री समेत शीर्ष नेता उग्रवाद की भेंट चढ़ गए। क्या उन्होंने कश्मीर में लोगों का दिल जीत लिया...जो लोग ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे, उन्हें जेल में डाल दिया गया और बिना किसी कारण के गिरफ्तार कर लिया गया जबकि कुछ अब भी नजरबंद हैं।”

अब्दुल्ला ने कहा, “क्या हम भारत के दुश्मन हैं। मुझे इन नेताओं पर अफसोस है और मैं सोचता हूं कि वे इस राष्ट्र को किस दिशा में ले जा रहे हैं। इस देश का क्या भविष्य होगा? हमने बर्बादी का रास्ता शुरू कर दिया है क्योंकि हम लोगों को नहीं जीत पा रहे हैं।”

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