देश की खबरें | क्या संसद खनिज भूमि पर राज्यों के कर पर सीमा तय कर सकती है: उच्चतम न्यायालय ने पूछा
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नयी दिल्ली, 28 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को झारखंड और ओडिशा जैसे खनिज समृद्ध राज्यों से पूछा कि क्या संसद खनिज भूमि पर उनके द्वारा लगाए जाने वाले कर पर कोई सीमा तय कर सकती है।
प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने स्वीकार किया कि राज्यों के पास संविधान के तहत ऐसी भूमि पर कर लगाने की शक्ति है।
पीठ इस बात पर विचार कर रही है कि क्या खनन पट्टों पर एकत्रित रॉयल्टी को कर के रूप में माना जा सकता है, जैसा कि 1989 में सात न्यायाधीशों की पीठ ने माना था।
हालाँकि, पीठ ने उनसे पूछा कि क्या यह शक्ति केंद्र सरकार को कोई सीमा या रोक लगाने से रोकती है।
सुनवाई बेनतीजा रही और यह बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी।
शीर्ष अदालत ने मंगलवार को इस विवादास्पद मुद्दे पर सुनवाई शुरू की कि क्या खनन और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत निकाले गए खनिजों पर देय रॉयल्टी कर की प्रकृति में है।
यह मुद्दा 1989 में इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड बनाम तमिलनाडु राज्य के मामले में शीर्ष अदालत की सात न्यायाधीशों की पीठ के फैसले के बाद उठा, जिसमें कहा गया था कि रॉयल्टी एक कर है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Feb 28, 2024 09:46 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

