देश की खबरें | कैग ने प्रतिपूरक वनीकरण नियोजन निकाय की निधि के प्रबंधन में खामियों को गिनाया

देहरादून, 22 फरवरी भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने उत्तराखंड के वन प्रभागों में प्रतिपूरक वनीकरण निधि के प्रबंधन में कई खामियों का जिक्र किया है जिनमें उनका अस्वीकार्य गतिविधियों पर खर्च किया जाना और केंद्र को संचालन संबंधी वार्षिक योजना प्रस्तुत करने में देरी शामिल है। इस तरह की देरी से विभिन्न मामलों में लागत में वृद्धि हुई है।

प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (सीएएमपीए) पर हाल ही में उत्तराखंड विधानसभा के चालू बजट सत्र के दौरान पेश की गई सीएजी की नवीनतम लेखापरीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रभाग स्तर पर 13.86 करोड़ रुपये अस्वीकार्य गतिविधियों पर खर्च किये गए।

इसमें कहा गया है कि ये पैसे राज्य की योजना हरेला, बाघ सफारी कार्य, मौजूदा भवनों के जीर्णोद्धार, व्यक्तियों के दौरे पर खर्च, अदालती मामले, आई-फोन, लैपटॉप, फ्रिज, कूलर और स्टेशनरी की खरीद जैसी अस्वीकार्य गतिविधियों पर खर्च किये गए।

इसमें कहा गया है कि राज्य प्राधिकरण ने राज्य प्रतिपूरक वनीकरण निधि के ‘डायवर्जन’ या अस्वीकार्य व्यय को नियंत्रित नहीं किया। सीएएमपीए के कामकाज पर लेखा रिपोर्ट 2019-2022 की अवधि को कवर करती है।

सीएएमपीए के नियमों के अनुसार, अवसंरचना या औद्योगिक विकास जैसी गैर-वन गतिविधियों के लिए वन भूमि के आवंटन के मामले में इसके अनुरूप प्रतिपूरक वनीकरण अनिवार्य है।

इसमें बताया गया है कि 52 मामलों में 188.62 हेक्टेयर वन भूमि गैर-वन उद्देश्यों के लिए उपयोगकर्ता एजेंसियों को ‘डायवर्ट’ की गई, जहां सैद्धांतिक मंजूरी तो दी गई लेकिन सक्षम प्राधिकारी द्वारा काम शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उपयोगकर्ता एजेंसियों ने बिना अनुमति के वन क्षेत्रों में सड़क निर्माण शुरू कर दिया और वन प्रभागों ने वन भूमि के अनधिकृत उपयोग का कोई संज्ञान नहीं लिया और इन्हें वन अपराध के मामलों के रूप में दर्ज किया। वर्ष 2009 के सीएएमपीए दिशानिर्देशों के अनुसार, धन प्राप्त होने के बाद राज्य सीएएमपीए वनीकरण को पूरा करेगा जिसके लिए एक या दो साल के भीतर प्रतिपूरक वनीकरण कोष में धन जमा किया जाता है।

हालांकि, विभागों में अभिलेखों की जांच से पता चला कि 37 मामलों में अंतिम मंजूरी मिलने के आठ साल से अधिक समय बाद प्रतिपूरक वनीकरण कार्य किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके परिणामस्वरूप प्रतिपूरक वनीकरण बढ़ाने में 11.54 करोड़ रुपये की लागत बढ़ गई।

लेखापरीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि संचालन की वार्षिक योजना को मंजूरी के लिए देरी से केंद्र के समक्ष प्रस्तुत करने और दोषपूर्ण योजना के कारण प्रतिपूरक वनीकरण गतिविधियों के क्रियान्वयन में बाधा आई।

निधियों का जारी किया जाना अवास्तविक था और स्वीकृत एपीओ के अनुरूप नहीं था। राज्य प्राधिकरण क्रियान्वयन करने वाली सभी एजेंसियों को गतिविधियों के लिए समान और आवश्यकता-आधारित निधि सुनिश्चित करने में विफल रहा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निधियों के जारी करने में अकुशलता थी, प्रतिपूरक वनीकरण निधि नियमों के अनुसार लेखांकन प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया और ब्याज देयता का निर्वहन नहीं किया गया।

कैग ने सिफारिश की है कि राज्य प्राधिकरण को आंतरिक नियंत्रण रखना चाहिए तथा सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन के लिए उचित बजटीय नियंत्रण जांच प्रणाली स्थापित करनी चाहिए ताकि सीएएमपीए निधि के दुरुपयोग या दुरुपयोग को रोका जा सके।

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