देश की खबरें | जहांगीरपुरी में बुलडोजर ने दुकानों को ढहाया, न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद रूका अभियान

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल उत्तर-पश्चिम दिल्ली में शोभायात्रा के दौरान हिंसा के कुछ दिनों बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासन वाले उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) के अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत जहांगीरपुरी में बुधवार को बुलडोजर के जरिए एक मस्जिद के पास कई ढांचों को तोड़ दिया गया।

तोड़फोड़ के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा दायर एक याचिका पर संज्ञान लेने के बाद उच्चतम न्यायालय को अभियान को रुकवाने के लिए दो बार हस्तक्षेप करना पड़ा।

एनडीएमसी द्वारा अतिक्रमणकारियों के खिलाफ अभियान शुरू करने के साथ ही इस इलाके में दंगा रोधी टुकड़ियों सहित सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात थे। दो घंटे से भी कम समय में, कई दुकानों और अवैध ढांचों को गिरा दिया गया। कुछ दुकान के मालिकों ने यह भी कहा कि उनके प्रतिष्ठानों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और स्थानीय नगर निगम की मंजूरी मिली हुई थी।

इस अभियान पर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया। कांग्रेस नेता राहुध गांधी ने सरकार पर निशाना साधा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि ‘नफरत के बुलडोजर’ को रोका जाए और ऊर्जा संयंत्रों को शुरू किया जाए।

एनडीएमसी की कार्रवाई रुकवाने के लिए अदालत का आदेश लेकर वहां पहुंचने वालीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, ‘‘न्यायालय ने सुबह 10:45 बजे यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। हमारे वकील कपिल सिब्बल और दुष्यंत दवे ने अदालत के सामने याचिका का जिक्र किया। मैं इस तोड़फोड़ को रोकने आयी हूं...अधिकारियों को न्यायालय के आदेश की धज्जियां उड़ाने से रोकने आई हूं।’’

बुलडोजर से कई दुकानों और सड़क के किनारे बनी गुमटियों को गिराए जाने से परेशान कुछ महिलाएं सड़क पर बैठी रो रही थीं। सड़कों पर कंक्रीट और ईंट का ढेर पड़ा हुआ था, लेकिन कोई हिंसक विरोध नहीं हुआ। दुकान मालिकों, जिनके प्रतिष्ठान ध्वस्त कर दिए गए थे, ने दावा किया कि एनडीएमसी ने उन्हें पूर्व सूचना दिए बिना अतिक्रमण अभियान शुरू किया।

मोहम्मद रहमान, जिनकी दुकान ढहा दी गई, ने कहा, ‘‘यदि आप (अधिकारी) दंडित करना चाहते हैं, तो गिरफ्तार किए गए आरोपियों को दंडित करें। आप पूरे समुदाय को दंडित क्यों कर रहे हैं? लोगों ने अपनी रोजी रोटी गंवा दी है।’’

जूस की दुकान चलाने वाले गणेश गुप्ता ने दावा किया कि डीडीए ने 1977 में उन्हें दुकान आवंटित की थी। गुप्ता ने कहा, ‘‘मैंने उन्हें दस्तावेज दिखाया लेकिन किसी ने मेरी नहीं सुनी।’’

इससे पहले, भाजपा की दिल्ली इकाई के प्रमुख आदेश गुप्ता ने मंगलवार को एनडीएमसी के महापौर को जहांगीरपुरी में “दंगाइयों” के अवैध निर्माण की पहचान करने और बुलडोजर का उपयोग करके उन्हें ध्वस्त करने के लिए एक पत्र लिखा था।

साजिद सैफी की इलेक्ट्रिकल रिपेयरिंग की दुकान को भी ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘शोभा यात्रा का बदला लिया जा रहा है।’’

स्थानीय लोगों के मुताबिक, न्यायालय द्वारा अभियान रोकने और यथास्थिति बनाए रखने के शुरुआती आदेश के बाद भी अतिक्रमण विरोधी अभियान डेढ़ घंटे तक चलता रहा।

एनडीएमसी के एक अधिकारी ने पहचान गुप्त रखे जाने की शर्त पर कहा कि शीर्ष अदालत से लिखित आदेश नहीं मिलने के कारण यह अभियान जारी रहा। अधिकारी ने कहा कि आदेश मिलते ही इसे रोक दिया गया।

वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पीठ का दोबारा रुख किया क्योंकि पहले का आदेश के बावजूद नगर निगम का अभियान जारी था।

दवे ने कहा, ‘‘मुझे इसका फिर से उल्लेख करते हुए खेद है... सुबह मैंने इस मामले का जिक्र किया था। (रोक) आदेश की सूचना देने के बावजूद वे (अधिकारी) तोड़फोड़ को नहीं रोक रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं मिली है। मैं महासचिव से पुलिस आयुक्त और उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर और आयुक्त को आदेश के बारे में बताने का अनुरोध करता हूं। अन्यथा देर हो जाएगी।’’

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ठीक है। सर्वोच्च अदालत के महासचिव के माध्यम से तत्काल इसकी सूचना दें।’’

इससे पहले, पीठ ने अभियान पर रोक लगाने का आदेश दिया और शनिवार के सांप्रदायिक दंगों में आरोपियों के खिलाफ कथित रूप से लक्षित नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई।

हालांकि, उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर राजा इकबाल सिंह ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद अभियान को रोक दिया गया। राजा इकबाल सिंह ने पीटीआई- से कहा, ‘‘'हम उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करेंगे। हमने अभियान रोक दिया है। हमनें तिरपाल के कुछ ढांचों को हटाया और कूड़ा वगैरह उठाया है।’’ उन्होंने दावा किया कि यह अतिक्रमणकारियों के खिलाफ नियमित कार्रवाई है और इसका 16 अप्रैल की हिंसा से कोई जुड़ाव नहीं है।

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