विदेश की खबरें | ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के विवादित ब्रेक्जिट विधेयक ने संसद में पहली बाधा पार की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के विवादित आंतरिक बाजार विधेयक ने संसद में पहली बाधा पार कर ली है। इस विधेयक के जरिये ब्रेक्जिट को लेकर ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए समझौते की कुछ शर्तों में बदलाव किया गया है। हाउस ऑफ कॉमन्स में हुए मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 340 में से 263 वोट पड़े।
लंदन, 15 सितंबर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के विवादित आंतरिक बाजार विधेयक ने संसद में पहली बाधा पार कर ली है। इस विधेयक के जरिये ब्रेक्जिट को लेकर ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए समझौते की कुछ शर्तों में बदलाव किया गया है। हाउस ऑफ कॉमन्स में हुए मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 340 में से 263 वोट पड़े।
विपक्षी दलों और जॉनसन की कन्जरवेटिव पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की कड़ी आचोलना का सामना करने वाला यह विधेयक जैसे-जैसे संसदीय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, इसका विरोध तेज होने की भी प्रबल संभावना है।
यह भी पढ़े | LAC पर तनाव बरकरार, चीन ने गलवान घाटी में 5G नेटवर्क लगाने की खबर को बताया गलत.
सरकार का कहना है कि अगर यूपोपीय संघ के साथ भविष्य के व्यापार सौदों को लेकर चल रही वार्ता विफल हो जाती है तो यह विधेयक उत्तरी आयरलैंड और शेष ब्रिटेन के हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होने से इससे ब्रिटेन का नुकसान होने की संभावना है। सत्तारूढ़ टोरी पार्टी के दो सांसदों सर रोजर गेल और एंड्रयू पर्सी ने सोमवार रात हुए मतदान में विधेयक के खिलाफ वोट दिया जबकि 30 सदस्य अनुपस्थित रहे।
यह भी पढ़े | पाकिस्तान में 6 महीने बाद फिर खुलेंगे शैक्षणिक संस्थान, पाक सरकार ने दिशानिर्देश किए जारी.
मतदान से पहले सोमवार शाम इस विधेयक पर लगभग पांच घंटे तक बहस हुई।
इस दौरान प्रधानमंत्री जॉनसन ने कह कि यह विधेयक ब्रिटेन की ''आर्थिक और राजनीतिक अखंडता'' सुनिश्चित करेगा।
इस विधेयक में एक जनवरी को ब्रिटेन के यूरोपीय संघ के एकल बाजार तथा नियमों से बाहर निकलने के बाद इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स एवं उत्तरी आयरलैंड के बीच वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त आदान-प्रदान की बात कही गई है।
इस विधेयक से सरकार को ईयू से बाहर निकलने के लिये हुए समझौतों में बदलाव की शक्ति मिल गई है जबकि ईयू से साथ हुआ उसका समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी है और उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 15, 2020 05:22 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

