देश की खबरें | पूर्वी लद्दाख में सीमा स्थिति, एकतरफा ढंग से यथास्थिति बदलने की चीनी कार्रवाई का ‘परिणाम’: भारत
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, तीन सितंबर भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में पिछले चार महीने में सीमा पर पैदा हुए हालात इस क्षेत्र में एकतरफा ढंग से यथास्थिति बदलने की चीनी कार्रवाई का ‘प्रत्यक्ष परिणाम’ है। इसके साथ ही भारत ने जोर दिया कि मुद्दों के समाधान का एकमात्र रास्ता बातचीत है ।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारत संवाद के जरिये सभी मुद्दों के समाधान के लिये प्रतिबद्ध है और मुद्दों के समाधान का रास्ता बातचीत है ।

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उन्होंने कहा, ‘‘ यह स्पष्ट है कि बीते चार महीने में हमने जो हालात देखे (पूर्वी लद्दाख में) हैं वे प्रत्यक्ष रूप से चीनी पक्ष की गतिविधियों का नतीजा हैं । चीन की गतिविधियों का मकसद यथास्थिति में एकतरफा बदलाव करना है ।’’

वहीं प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने जोर दिया कि भारत के सैन्य बल चीन की आक्रामक गतिविधियों से ‘‘सबसे बेहतर एवं उचित तरीकों’’ से निपटने में सक्षम हैं।

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इस बीच थल सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने बृहस्पतिवार को लद्दाख का दो दिवसीय दौरा शुरू किया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पैंगोंग झील के दक्षिणी तट के आस-पास यथास्थिति को बदलने के चीन के हालिया प्रयासों के मद्देनजर क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति की व्यापक समीक्षा करने के मकसद से सेना प्रमुख का यह दौरा हो रहा है।

श्रीवास्तव ने ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘‘ हम पुरजोर तरीके से चीन से आग्रह करते हैं कि वह पूरी तरह पीछे हटने के कदम के जरिये सीमा पर तेजी से शांति बहाली के उद्देश्य के साथ भारतीय पक्ष से गंभीरता से जुड़े ।’’

रावत ने कहा कि भारत के सैन्य बल चीन की आक्रामक गतिविधियों से ‘‘सबसे बेहतर एवं उचित तरीकों’’ से निपटने में सक्षम हैं।

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि भारत परमाणु से लेकर अर्द्ध-परंपरागत तक हर संभावित संघर्ष के सर्वाधिक जटिल खतरों और चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य बल उनसे निपटने के लिए तैयार हैं।

जनरल रावत ने ऑनलाइन कार्यक्रम में कहा, ‘‘भारत चीन की कुछ आक्रामक हरकतों को देखता आ रहा है, पर हम इनसे समुचित ढंग से निपटने में सक्षम हैं।’’

ब्रीफिंग में श्रीवास्तव ने भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच टेलीफोन पर बातचीत के अलावा सीमा के सवालों पर दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) के बीच बातचीत का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, "हम दोनों विदेश मंत्रियों और एसआर के बीच बनी सहमति को दोहराते हैं कि सीमा की स्थिति को जिम्मेदार तरीके से संभाला जाना चाहिए और दोनों पक्षों में किसी को भी मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।"

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