देश की खबरें | नायडू के उपराष्ट्रपति के तौर पर तीन साल पूरा करने के उपलक्ष्य में पुस्तक का विमोचन
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 11 अगस्त उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि हाल में राज्य सभा में निरंतर अधिक काम-काज होना “परिवर्तन की हवा” चलने का संकेत देता है। उन्होंने संसद एवं विधानसभाओं में चर्चाओं की गुणवत्ता बढ़ाकर तथा रचनात्मक दृष्टिकोण को अपनाकर उन्हें अधिक जीवंत बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

राज्यसभा के सभापति, नायडू द्वारा ये बातें एक पुस्तक के विमोचन के दौरान कहीं गईं जिनमें उपराष्ट्रपति के तौर पर उनके तीन साल के कार्यकाल का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया गया है।

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पुस्तक का विमोचन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तथा अन्य की मौजूदगी में किया।

नायडू ने उपराष्ट्रपति के तौर पर मंगलवार को तीन साल पूरे किए। उपराष्ट्रपति बनने से पूर्व वह केंद्रीय मंत्री थे। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

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कार्यक्रम में, सिंह ने कहा कि अगर वैश्विक महामारी नहीं आती तो भारत अगले कुछ वर्षों में देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होता।

रक्षा मंत्री ने कहा कि नायडू हमेशा से मजबूत, स्वाभिमानी और समृद्ध भारत के इच्छुक रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे उपराष्ट्रपति कितने सौभाग्यशाली हैं क्योंकि उपराष्ट्रपति के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत मजबूत बन रहा है, यह दुनिया में एक स्वाभिमानी देश के तौर पर अपनी छवि बनाने में कामयाब रहा है और आर्थिक दृष्टि से भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है।”

सिंह ने कहा, “अगर वैश्विक महामारी नहीं आई होती..तो आने वाले वर्षों में, संभवत: सात से आठ वर्षों में, हम भारत को विश्व की तीन शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने में सफल हो गए होते।” साथ ही उन्होंने कहा कि, “हमें भरोसा है कि भारत आगे बढ़ेगा।”

वहीं, अपनी टिप्पणियों में नायडू ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में,राज्य सभा ने कुल 93 विधेयक पारित किए जिनमें कई दूरगामी परिणाम वाले विधेयक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 60 विधेयक यानि कुल विधेयक में से 65 प्रतिशत विधेयक पिछले तीन सत्रों के दौरान पारित किए गए।

नायडू ने यह भी कहा कि राज्य सभा में विचारशील काम-काज पर खर्च किया गया वक्त भी बढ़ा है जहां सदन में काम-काज का कुल वक्त 2004-14 के 28 प्रतिशत के मुकाबले रिकॉर्ड 36 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

उन्होंने कहा, “मैंने 1952 में राज्य सभा के अस्तित्व में आने के बाद से उसकी कार्यप्रणाली का विश्लेषण शुरू किया है। इस अनोखे तरह के प्रयास में कई बड़े खुलासे हुए हैं।”

नायडू ने कहा कि पिछले 68 वर्षों में, सरकारों के पास 39 वर्ष तक राज्य सभा में बहुमत नहीं रहा है जिसमें पिछले 31 वर्षों का कार्यकाल भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा इसलिए जरूरी है क्योंकि सदन की संरचना उसकी कार्यप्रणाली पर असर डालती है।

नायडू ने कहा कि किसी विधेयक को पारित करने में लगने वाला वक्त इन वर्षों में लगभग समान ही रहा है।

हालंकि, उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल समेत अन्य माध्यमों के जरिए कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने में लगने वाला वक्त बीते वर्षों में घटा है।

‘कनेक्टिंग, कम्युनिकेटिंग, चेंजिंग’ शीर्षक वाली यह पुस्तक 250 से अधिक पन्नों की है और इसे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का प्रकाशन विभाग लेकर आया है।

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