नयी दिल्ली, 15 दिसंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने शुक्रवार को लोकसभा में सुरक्षा उल्लंघन के कुछ पुराने उदाहरणों को साझा करते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी ने कभी भी ऐसे मामलों में सरकारी अधिकारियों पर हमला नहीं किया और न ही अध्यक्ष का इस्तीफा मांगा।
दुबे के मुताबिक, रतन लाल नाम का एक व्यक्ति 11 अप्रैल, 1974 को पिस्तौल लेकर दर्शक दीर्घा में पहुंचा था, लेकिन भाजपा के पूर्ववर्ती जनसंघ ने कभी तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष का इस्तीफा नहीं मांगा। इंदिरा गांधी 1974 में प्रधानमंत्री थीं।
दुबे ने कहा कि पूरे संसद भवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल लोकसभा सचिवालय की है।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि इन (विपक्षी) दलों की ओर से अमित शाह के इस्तीफे की मांग और संसद की कार्यवाही ठप करने के बीच कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को 'शर्मिंदा' होना चाहिए।
कई विपक्षी सांसदों ने अपनी टिप्पणियों में शाह के इस्तीफे की मांग की है, जबकि सरकार जोर दे रही है कि वह संसद की सुरक्षा के मामलों में केवल अध्यक्ष के निर्देशों का पालन करती है।
उन्होंने इस क्रम में उस घटनाक्रम का भी हवाला दिया, जिसमें एक बार एक व्यक्ति तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव के निकट पहुंच गया था।
दुबे ने कहा कि प्रेम पाल पांच मई 1994 को लोकसभा कक्ष में कूद गया था और राव के करीब चला गया था। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने तब अपनी प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री या तत्कालीन गृह मंत्री का जिक्र नहीं किया था।
उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा, "इस तरह की ओछी राजनीति ठीक नहीं है।"
लोकसभा कक्ष में बुधवार को दो लोग कूद गए थे। फिर उन्होंने एक कैन से वहां धुआं फैला दिया। इस घटना के बाद संसद में बहुत कम कामकाज हुआ है, क्योंकि विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार पर हमला किया है।
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