हुब्बल्लि (कर्नाटक), 19 जनवरी कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घुमंतू लंबानी (बंजारा) जनजातियों को जमीन का मालिकाना हक दिए जाने पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेश में उनके नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए अच्छे कामों का श्रेय ले रही है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वे ‘टांडा’ (लंबानी समुदाय की बस्तियां) को राजस्व गांव का दर्जा दे रहे हैं, जो “भ्रामक” है।
बोम्मई सरकार के मुताबिक, यह ‘हक्कू पत्र’ (मालिकाना हक के दस्तावेज) वितरित करने से उत्तरी कर्नाटक के पांच जिलों में रहने वाले समुदाय के 52,072 लोग लाभान्वित होंगे और उन्हें “स्थायी छत” मिलेगी।
सिद्धरमैया के अनुसार, तथ्य यह है कि ‘टांडा’ को राजस्व गांव बनाने की प्रक्रिया 2013 से 2018 तक कर्नाटक की सत्ता में रही उनकी सरकार के दौरान शुरू की गई थी।
कर्नाटक विधानसभा में नेता विपक्ष ने यहां संवाददाताओं को बताया, “मेरी सरकार में तत्कालीन राजस्व मंत्री कागोडु थिम्मप्पा ने वन अधिनियम और भू-राजस्व अधिनियम में संशोधन किया और नारा दिया कि ‘जो जमीन जोतते हैं, उन्हें ही इसका मालिक होना चाहिए’। वे ऐतिहासिक संशोधन थे।”
सिद्धरमैया ने ‘हक्कू पत्र’ वितरण अभियान की शुरुआत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने, इन ‘टांडा’ को राजस्व गांव कैसे बनाया जाए, इस पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए समिति गठित की थी। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने के लिए एक आईएएस अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया था।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लाभार्थियों को ‘हक्कू पत्र’ नहीं दे सकी क्योंकि बाद में वह सत्ता से बाहर हो गई।
उन्होंने आरोप लगाया, “भाजपा ने पिछले चार सालों में बिना कुछ किए अचानक दावा करना शुरू कर दिया है कि उन्होंने सब कुछ किया। आने वाले चुनावों के कारण भाजपा हमारे द्वारा बनाए गए भोजन पर दावत दे रही है।”
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