नयी दिल्ली, 23 मई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने कहा है कि उनकी पार्टी अन्नाद्रमुक नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के बाद राज्य की राजनीति में रिक्त हुए स्थान को भर रही है। उन्होंने कहा कि जयललिता ‘‘कहीं बेहतर’’ हिंदुत्व नेता थीं।
अन्नामलाई ने यहां ‘पीटीआई’ संपादकों के साथ बातचीत में कहा कि उन्हें विश्वास है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को तमिलनाडु में दोहरे अंक में मत प्रतिशत मिलेगा और वह राज्य में तीसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी।
आईपीएस अधिकारी से राजनीतिज्ञ बने अन्नामलाई ने कहा कि जयललिता के निधन के बाद अन्नाद्रमुक के हिंदुत्व की विचारधारा से ‘‘दूर जाने’’ के कारण रिक्त हुए स्थान को भरने की भाजपा में काफी क्षमता है।
अन्नामलाई ने कहा, ‘‘अब यदि आप देखें, तो जब तक जयललिता जीवित थीं, वह तमिलनाडु में किसी अन्य की तुलना में कहीं बेहतर हिंदुत्व नेता थीं। वर्ष 2014 से पहले जब आपके पास भाजपा जैसी पार्टी थी और नेता के रूप में जयललिता थीं, तो हिंदू मतदाता की स्वाभाविक पसंद जयललिता थी, जिन्होंने अपनी हिंदुत्व पहचान को सार्वजनिक तौर पर जाहिर किया था।’’
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं के अलावा जयललिता देश की पहली राजनीतिज्ञ थीं, जिन्होंने अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे का समर्थन किया था और 2002-03 में तमिलनाडु में धर्मांतरण विरोधी कानून बनाया था।
अन्नामलाई ने कहा, ‘‘धर्मांतरण विरोधी कानून बनाना, एक ऐसी शख्सियत जिसने मंदिरों को उदारतापूर्वक दान दिया, श्रीरंगम से चुनाव लड़ा, व्यापक पैमाने पर मंदिरों का पुनरुद्धार करने के प्रयास किये और सभी प्रमुख मंदिरों को हाथी उपहार में दिये। एक व्यक्ति के तौर पर उनकी गतिविधियों पर नजर डालें तो वह कहीं बेहतर हिंदू नेता थीं।’’
उन्होंने कहा कि 2016 में जयललिता के निधन के बाद अन्नाद्रमुक ने हिंदुत्व के आदर्शों से किनारा कर लिया है और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) से हाथ मिला लिया, जिसे प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की राजनीतिक शाखा माना जाता है।
अन्नामलाई ने कहा, ‘‘तमिलनाडु में पहली बार, यदि हिंदू एक समूह के रूप में किसी ऐसी पार्टी की तलाश कर रहे हैं जो उनके मंदिरों की रक्षा करेगी, तो स्वाभाविक रूप से वह पार्टी भाजपा है।’’
उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि गैर-हिंदू धार्मिक समूहों में भी भाजपा के समर्थक हैं। उन्होंने बताया कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यक समुदायों से दो उम्मीदवार उतारे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं ईमानदारी के साथ कहना चाहूंगा कि भाजपा को दो कारकों 2014 में मोदी जी के सत्ता में आने और जयललिता अम्मा के निधन के कारण तमिलनाडु में व्यापक पैमाने पर जगह मिली।’’
अन्नामलाई ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा तमिलनाडु में तीसरी बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी, जहां क्षेत्रीय दलों - द्रमुक और अन्नाद्रमुक ने अपना वर्चस्व कायम रखा है।
उन्होंने कहा, ‘‘द्रमुक और अन्नाद्रमुक ने यह धारणा बना ली थी कि चेन्नई में रहने वाले लोग दिल्ली में रहने वाले लोगों की तुलना में तमिलनाडु पर शासन करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।’’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आने के बाद लोगों का भाजपा में विश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तमिलनाडु की बार-बार यात्रा करना, काशी तमिल संगमम्, सौराष्ट्र तमिल संगमम् जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन, नए संसद भवन में राजदंड (सेंगोल) स्थापित करना और राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के जरिये भाजपा को राज्य के लोगों तक अपनी पहुंच बनाने में मदद मिली।
अन्नामलाई ने विश्वास जताया कि भाजपा और उसके सहयोगियों को लोकसभा चुनाव में दक्षिणी राज्यों से ‘‘ऐतिहासिक जनादेश’’ मिलेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को तमिलनाडु में दोहरे अंक में मत प्रतिशत मिलेगा, जद (एस) के साथ गठबंधन के कारण कर्नाटक में जीत हासिल होगी और केरल में अच्छे नतीजे मिलेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘इस चुनाव में सबसे ज्यादा हैरान करने वाले नतीजे तेलंगाना से सामने आयेंगे। वर्ष 2019 में कुल 17 सीट में से हमने चार जीती थीं। मुझे पूरा विश्वास है कि हम इस बार नौ से अधिक सीट पर जीत दर्ज करेंगे। आंध्र प्रदेश में भाजपा ने गठबंधन में छह सीट पर चुनाव लड़ा। मुझे पूरा भरोसा है कि आंध्र में भी हम अच्छी संख्या में सीट हासिल करेंगे।’’
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