देश की खबरें | भाजपा का अमेरिकी कारोबारी सोरोस पर हमला, भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को ‘निशाना’ बनाने का लगाया आरोप

नयी दिल्ली, 17 फरवरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को अमेरिकी अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस पर जोरदार हमला करते हुए उन पर न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली को भी निशाना बनाने का आरोप लगाया। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी ने यह आरोप भी लगाया कि सोरोस भारतीय लोकतंत्र को तबाह करना चाहते हैं और उनकी मंशा है कि यहां कुछ 'चुनिंदा' लोग सरकार चलाएं।

सोरोस ने कहा है कि भारतीय व्यवसायी गौतम अडानी के कारोबारी साम्राज्य में उथल-पुथल ने निवेश के अवसर के रूप में भारत में विश्वास को हिला दिया है और यह भारत में ‘‘लोकतांत्रिक पुनरुद्धार’’ के द्वार खोल सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी लोकतांत्रिक नहीं हैं।

वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने संवाददाताओं से कहा कि सोरोस का ऐलान भारत के खिलाफ युद्ध थोपने जैसा है और इस युद्ध तथा भारत के हितों के बीच में मोदी खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सभी को एक स्वर में सोरोस की टिप्पणी की निंदा करनी चाहिए।

वहीं, कांग्रेस ने कहा कि भारत में नेहरूवादी विरासत यह सुनिश्चित करती है कि अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस जैसे लोग भारतीय चुनावों के परिणाम तय नहीं कर सकते।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री से जुड़ा अडाणी घोटाला भारत में लोकतांत्रिक पुनरुत्थान शुरू करता है या नहीं, यह पूरी तरह कांग्रेस, विपक्ष व हमारी चुनाव प्रक्रिया पर निर्भर है। इसका जॉर्ज सोरोस से कोई लेना-देना नहीं है।’’

रमेश ने इस बात पर जोर दिया, ‘‘हमारी नेहरूवादी विरासत सुनिश्चित करती है कि उन जैसे लोग हमारे चुनाव परिणाम तय नहीं कर सकते।’’

ईरानी ने कहा कि सोरोस जैसे आलोचकों ने भारत पर हमला इसलिए शुरु कर दिया है क्योंकि वह दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यस्था के रूप में उभरा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हिंदुस्तान की सरकार और प्रधान सेवक नरेन्द्र मोदी ऐसे गलत इरादों के सामने नहीं झुकेंगे। जब-जब हिंदुस्तान को चुनौती दी गई, हमने विदेशी ताकतों को पहले भी हराया है और आगे भी हराते रहेंगे।’’

ईरानी ने हालांकि कांग्रेस का कोई सीधा जिक्र नहीं किया, लेकिन शहजाद पूनावाला और आरपी सिंह सहित भाजपा के कुछ प्रवक्ताओं ने सोरोस के साथ विपक्षी पार्टी के संबंधों पर सवाल उठाए। सिंह ने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी ने कभी सोरोस से मुलाकात की है?

एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सोरोस के बयानों को केवल मोदी की छवि धूमिल करने के प्रयास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि वह सरकार बदलने की भी बात कर रहे हैं।

सोरोस ने बृहस्पतिवार को म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में एक संबोधन में कहा कि मोदी को अडाणी समूह के आरोपों पर विदेशी निवेशकों और संसद के "सवालों का जवाब देना होगा"।

उनका लगभग 42 मिनट का भाषण जलवायु परिवर्तन, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका की समस्या, तुर्की आपदा और चीन की विफलताओं पर केंद्रित रहा।

उन्होंने दावा किया, "मोदी और कारोबार जगत की महत्वपूर्ण हस्ती अडाणी करीबी सहयोगी हैं और उनके हित आपस में जुडे हैं।" सोरोस ने कहा, "अडाणी समूह पर शेयरों में धोखाधड़ी का आरोप है और उसकी कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह ढह गये। मोदी इस विषय पर चुप हैं, लेकिन उन्हें विदेशी निवेशकों और संसद में सवालों का जवाब देना होगा।"

उन्होंने, हालांकि अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।

उन्होंने कहा, "इससे भारत की केंद्र सरकार पर मोदी का दबदबा काफी कमजोर हो जाएगा और आवश्यक तौर पर संस्थागत सुधारों को आगे बढ़ाने का दरवाजा खुल जाएगा।"

सोरोस ने कहा, "मैं अनाड़ी हो सकता हूं, लेकिन मुझे भारत में एक लोकतांत्रिक पुनरुद्धार की उम्मीद नजर आ रही है।"

ईरानी ने दावा किया कि सोरोस ने भारत समेत विश्व की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप के लिए एक अरब डॉलर से अधिक का कोष बनाया है।

उन्होंने कहा, ‘‘एक विदेशी ताकत जिसके केंद्र बिंदु में जॉर्ज सोरोस हैं...उन्होंने ऐलान किया है कि वह हिंदुस्तान के लोकतांत्रिक ढांचे पर चोट करेंगे...वह प्रधानमंत्री मोदी को अपने वार का मुख्य बिंदु बनाएंगे...वह हिंदुस्तान में अपनी विदेशी ताकत के अंतर्गत एक ऐसी व्यवस्था बनाएंगे जो हिंदुस्तान के हितों का नहीं बल्कि उनके हितों का संरक्षण करेगी।’’

उन्होंने कहा कि सोरोस के शब्दों को गौर से देखें तो वह चाहते हैं कि उनकी विदेशी व्यवस्था को जो सरकार सहयोग करे, ऐसी सरकार हिंदुस्तान में उचित है।

ईरानी ने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहा है और जब भारत को अमेरिका और फ्रांस के राष्ट्रपतियों और इंग्लैंड के प्रधानमंत्री जैसे वैश्विक नेताओं द्वारा आभार प्राप्त हो रहा है, कारोबारी के साम्राज्यवादी इरादे सामने आ रहे हैं, जो हमारे लोकतंत्र को खलनायक की तरह पेश करना चाहते हैं। यह नया हिन्दुस्तान है, कमजोर नहीं है।’’

उन्होंने दावा किया कि सोरोस ने भारत सहित अन्य लोकतांत्रिक प्रणालियों में हस्तक्षेप करने के लिए एक अरब डॉलर (100 करोड़ रुपये) से अधिक का कोष बनाया है।

उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति, संगठन और समाज से इस व्यक्ति के इरादे की निंदा करने का आग्रह किया जो अपने निजी लाभ के लिए हमारे लोकतांत्रिक हितों को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार है जो लोक हितों के संरक्षण और व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का काम करती है।

ईरानी ने कहा, ‘‘आज देश के आवाम से मैं अपील करना चाहती हूं... चाहे आप व्यक्ति हों, संगठन हों या राजनीतिक दल हों ....... इसका मुंहतोड़ जवाब देना है।’’

शिवसेना (उद्धव ठाकरे) की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मुद्दे पर तीखी टिप्पणियों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे भारतीय अरबपतियों की अन्य देशों पर भी राय है। शुक्र है कि उन देशों में ट्रोल मंत्री नहीं हैं जो लोकतंत्र या राष्ट्र के लिए खतरा बताने के लिए प्रेस कांफ्रेंस करें।’’

उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा विदेशी एजेंसी है जो दुष्प्रचार अभियानों के जरिए चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रही है, मीडिया की स्वतंत्रता का गला घोंट रही है, स्वतंत्र एजेंसियों को कमजोर कर रही है और न्यायपालिका पर हमला कर रही है।

ईरानी पर निशाना साधते हुए तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, ‘‘माननीय कैबिनेट मंत्री ने हर भारतीय से जॉर्ज सोरोस को उचित जवाब देने का आग्रह किया है। कृपया आज शाम 6 बजे अपनी थाली बजाएं।’’

इससे पहले, ईरानी ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि सोरोस ने बैंक ऑफ इंग्लैंड की कमर तोड़ दी और दावा किया कि उन्हें ‘‘आर्थिक युद्ध अपराधी’’ घोषित किया गया है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के तहत भारत कोविड महामारी के दौरान ‘‘दुनिया की फार्मेसी’’ बन गया और 80 लाख से अधिक लोगों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

उन्होंने कहा कि हाल के बजट में रक्षा के लिए सबसे अधिक आवंटन किया गया है और प्रधानमंत्री ने देश के भविष्य की नींव रखी है जो न केवल लोगों के सपनों को साकार करेगा बल्कि एक लचीली और मजबूत अर्थव्यवस्था भी सुनिश्चित करेगा।

अडाणी समूह 24 जनवरी को अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा उस पर लेखा धोखाधड़ी और स्टॉक हेरफेर का आरोप लगाए जाने के बाद से गंभीर दबाव में है। इन आरोपों को समूह ने ‘‘दुर्भावनापूर्ण’’, ‘‘आधारहीन’’ और ‘‘भारत पर सोचा-समझा हमला’’ कहकर खारिज कर दिया है।

ब्रजेन्द्र

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