देश की खबरें | एलपीजी की कीमतों में 30 नवंबर तक कटौती नहीं करने पर बीजद की आंदोलन तेज करने की धमकी

भुवनेश्वर, 25 नवंबर ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) ने 30 नवंबर तक रसोई गैस सिलेंडरों की कीमतों में केंद्र सरकार द्वारा कटौती नहीं किये जाने पर अपना आंदोलन तेज कर देने की धमकी दी है। पार्टी नेताओं ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

बीजद ने राज्य में सभी 314 प्रखंडों (ब्लॉक) के बाहर तीन दिनों तक धरना दिया, जो बुधवार को समाप्त हो गया।

बीजद की युवा शाखा के प्रमुख एवं विधायक ब्योमकेश रे ने पार्टी के दो अन्य विधायकों के साथ यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘यदि केंद्र ने 930 रुपये मे मिल रहे 14 किग्रा के (रसोई गैस) सिलेंडर की कीमत की समीक्षा नहीं की तो बीजद फिर से अपना आंदोलन तेज कर देगा।’’

अंतरराष्ट्रीय बाजार में (प्राकृतिक गैस की) कीमत में वृद्धि होने के कारण रसोई गैस की कीमत बढ़ने की भारतीय जनता पार्टी की दलील को खारिज करते हुए बीजद नेताओं ने कहा, ‘‘रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 2014 में 414 रुपये थी, तब प्राकृतिक गैस छह डॉलर प्रति बीटीयू (ब्रिटिश थर्मल यूनिट) थी। अब प्रति सिलेंडर 930 रुपये कीमत है, जबकि (प्राकृतिक गैस की) अंतरराष्ट्रीय कीमत 5.8 डॉलर प्रति बीटीयू है।’’

बीजद ने एक बयान में कहा, ‘‘2014 से रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 123 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’’

बयान में कहा गया है कि इसी तरह बगैर किसी कारण के ईंधन की कीमत में भी वृद्धि हुई।

इस बीच, राज्यव्यापी जन जागरण अभियान के तहत युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भगवा पार्टी पर ‘‘अच्छे दिन’’ का नारा लगाके लोगों को ठगने का आरोप लगाते हुए राज्य की राजधानी में राजमहल स्कवायर पर हंगामेदार प्रदर्शन किया।

उन्होंने रसोई गैस और ईंधन की कीमतों में वृद्धि के लिए बीजद को भी जिम्मेदार ठहराया।

प्रदेश युवा कांग्रेस प्रमुख एस. आर. लेनका ने कहा, ‘‘बीजद ने हमेशा ही भाजपा की नीतियों का समर्थन किया है और गैस तथा ईंधन की कीमतों में वृद्धि इसी का हिस्सा है। ’’

युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी भी की तथा आरोप लगाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान ईंधन, रसोई गैस व अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में हुई तीव्र वृद्धि ने गरीबों और मध्य वर्ग की कमर तोड़ दी है।

युवा कांग्रेस ने कहा कि यदि रसोई गैस, ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की समीक्षा नहीं की जाती है तो वह केंद्र के खिलाफ अपना आंदोलन तेज कर देगी।

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