मुंबई, पांच जुलाई बिहार इस साल मार्च में छोटी राशि के कर्ज (एमएफआई) के मामले में तमिलनाडु को पछाड़कर शीर्ष पर पहुंच गया है। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
ऋण सूचना देने वाली एक कंपनी की रिपोर्ट में बताया गया कि बिहार ने मार्च तिमाही में सकल ऋण में सालाना आधार पर 13.5 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की।
क्रिफ हाई मार्क की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में मार्च तक 48,900 करोड़ रुपये का कुल सूक्ष्म ऋण लिया गया, जो कुल आंकड़ों का 14.5 प्रतिशत है, जबकि तमिलनाडु में 46,300 करोड़ रुपये का ऋण आवंटित किया गया जो कुल कर्ज का 13.7 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुल एमएफआई मार्च अंत में सालाना आधार पर 17.9 प्रतिशत वृद्धि के साथ 3.37 लाख करोड़ रुपये रहा। इस दौरान संपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।
रिपोर्ट में बताया गया कि 90 दिनों से अधिक समय से बकाया एमएफआई ऋण का अनुपात मार्च, 2023 तक घटकर 1.1 प्रतिशत हो गया, जबकि दिसंबर, 2022 में यह दो प्रतिशत था।
शीर्ष 10 राज्यों में अब कुल बकाया ऋण का 85 प्रतिशत हिस्सा है। इसमें उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और केरल भी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार प्रति कर्जदाता ऋण बिहार में सबसे ज्यादा 27,200 रुपये है जबकि तमिलनाडु में यह 26,600 रुपये है।
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