पटना, 21 अक्टूबर गांधीवादी विनोबा भावे द्वारा शुरू किए गए भूमि दान के अभियान ‘भूदान आंदोलन’ के लगभग 60 साल बाद, बिहार सरकार ने आंदोलन के दौरान दान की गई लगभग 1.60 लाख एकड़ भूमि भूमिहीन लोगों के बीच वितरण के लिए उपयुक्त पाई है।
बिहार सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सूत्रों ने पुष्टि की कि इस 1.60 लाख एकड़ (राजस्व अधिकारियों द्वारा प्रमाणित) ‘पुष्ट’ भूमि के वितरण की प्रक्रिया इस साल दिसंबर के बाद कभी भी शुरू हो सकती है।
लोगों द्वारा 1950 और 60 के दशक की शुरुआत में जमीन के कई भूखंड दान में दिए गए थे। लेकिन जब राज्य भूदान समिति द्वारा प्रमाणीकरण के लिए उनकी जांच की जा रही थी, तो यह पाया गया कि उनमें से कई में दस्तावेजी विवरण नहीं है। हालांकि दान किये गये भूखंड कानूनी रूप से अभी भी दाताओं के स्वामित्व में हैं।
इसके अलावा, भूदान समिति ने पाया कि कुछ भूखंड वास्तव में नदी के तल, पहाड़ियों और जंगलों पर थे।
राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन समस्याओं के कारण पूरी प्रक्रिया में इतनी देर हो गई।
अधिकारी ने कहा, ‘‘जो भूखंड उपयुक्त पाए गए, उन्हें प्रक्रिया शुरू होने के बाद भूमिहीनों में समान रूप से वितरित कर दिया जाएगा। विभाग राज्य में भूदान आंदोलन के तहत प्राप्त लगभग 6.48 लाख एकड़ भूमि के प्रबंधन और वितरण में अनियमितताओं की जांच के वास्ते गठित आयोग की अंतिम रिपोर्ट का भी इंतजार कर रहा है।’’
बिहार सरकार ने 2017 में तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया था। राज्य के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोग के नवंबर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपनी रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है।
भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री आलोक कुमार मेहता ने ‘पीटीआई-’ को बताया, ‘‘हां, यह सच है कि भूदान आंदोलन के दौरान दान की गई लगभग 1.60 लाख एकड़ भूमि, भूमिहीन लोगों के बीच वितरण के लिए उपयुक्त पाई गई है।’’
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