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-अमेरिका ने भारत को 93 मिलियन डॉलर के हथियारों की बिक्री को दी मंजूरी
- ट्रंप ने किए बिल पर हस्ताक्षर, 30 दिनों में सार्वजनिक होंगी जेफ्री एपस्टीन की फाइलें
- अमेरिका को पीछे छोड़ चीन फिर बना जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
फिलीपींस में मानव तस्करी के मामले में पूर्व मेयर को उम्रकैद
फिलीपींस की एक अदालत ने गुरुवार को बामंबान की पूर्व मेयर एलिस गुओ को मानव तस्करी के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. जांच में सामने आया कि गुओ असल में चीनी नागरिक 'गुओ हुआ पिंग' हैं, जिन्होंने फिलीपीनी नागरिक बनकर मेयर का चुनाव जीता था. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, उन्हें 40 साल की जेल और 20 लाख फिलीपीनी पेसो (33,875 डॉलर) का जुर्माना भरना होगा. राज्य अभियोजक ओलिविया टोरेविला ने कहा, “सिर्फ एक साल बाद ही कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दे दिया. एलिस गुओ और सात अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिली है.”
मार्च 2024 में जब पुलिस ने एक गुप्त सूचना पर उनके स्कैम सेंटर पर छापा मारा, तब यह बात बाहर निकली. वहां 700 से अधिक विदेशी नागरिकों को छुड़ाया गया, जिन्हें ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता था. दस्तावेजों से साबित हुआ कि गुओ ही उस परिसर की मालिक थीं. गिरफ्तारी से बचने के लिए गुओ देश छोड़कर भाग गई थीं, लेकिन सितंबर 2024 में इंडोनेशियाई पुलिस ने उन्हें धर दबोचा.
इस फैसले पर राष्ट्रपति के संगठित अपराध विरोधी आयोग (PAOCC) ने कहा, “यह फैसला ना केवल कानूनी बल्कि एक नैतिक जीत भी है. यह पीड़ितों को न्याय देगा और संगठित अपराध के खिलाफ सरकार की एकजुटता भी दिखाता है.” संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर अपराध एक बड़ी समस्या है, जहां 2023 में लोगों ने ऐसे घोटालों में करीब 37 अरब डॉलर गंवा दिए.
विश्व बैंक: कम आय वाले देशों को स्वास्थ्य देखभाल खर्च तीन गुना करने की जरूरत
विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, माली, इथियोपिया और युगांडा जैसे कम आय वाले देशों में स्वास्थ्य पर खर्च बेहद कम है. 2024 में इन देशों का औसत वार्षिक स्वास्थ्य खर्च केवल 17 डॉलर प्रति व्यक्ति रहा, जो बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक अनुमानित न्यूनतम राशि का एक-तिहाई भी नहीं है.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह समस्या केवल निम्न-आय वाले देशों तक सीमित नहीं है. निम्न-मध्यम आय वाले देशों, जिनमें भारत, पाकिस्तान, वियतनाम और सोलोमन द्वीप शामिल हैं, ने 2024 में प्रति व्यक्ति औसतन 47 डॉलर खर्च किया, जबकि विश्व बैंक का अनुमान है कि कम से कम 90 डॉलर प्रति व्यक्ति खर्च होना चाहिए. इस गिरावट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय विकास सहायता में कमी बताया गया है.
अमेरिका के अलावा फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने भी इस क्षेत्र में बचत की घोषणा की है. विश्व बैंक का कहना है कि बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का अहम कारक है और यदि खर्च में गिरावट जारी रही तो कई देशों की विकास गति प्रभावित हो सकती है.
अमेरिका को पीछे छोड़ चीन फिर बना जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
साल 2025 के पहले नौ महीनों में चीन एक बार फिर अमेरिका को पीछे छोड़कर जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है. इस दौरान जर्मनी में चीनी सामान के आयात में बढ़ोतरी देखी गई, जो इस उभार की खास वजह बना. दुनिया भर में टैरिफ को लेकर तनाव चल रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की सख्त व्यापारिक नीतियों पर सबकी नजर है. साथ ही, दोनों ही प्रमुख बाजारों में जर्मनी के निर्यात, खासकर कारों की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसमें चीन से 12.3% और अमेरिका से 7.8% की गिरावट दर्ज की गई है.
जर्मनी द्वारा जारी किए गए नए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर के बीच चीन के साथ कुल व्यापार लगभग 186 अरब यूरो रहा, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ा ज्यादा है. वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका के साथ व्यापार में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 185 अरब यूरो के करीब रह गया. गौर करने वाली बात यह है कि चीन 2016 से लगातार जर्मनी का सबसे बड़ा साझेदार बना हुआ था, लेकिन पिछले साल अमेरिका ने उसे पीछे छोड़ दिया था. लेकिन अब चीन ने वो जगह दोबारा ले ली है.
हालांकि, आंकड़ों की गहराई में जाएं तो तस्वीर थोड़ी अलग है. जर्मनी ने दोनों देशों से आयात तो बढ़ाया है (चीन से 8.5 प्रतिशत और अमेरिका से 2.8 प्रतिशत), लेकिन वहां अपना सामान बेचने में उसे नुकसान उठाना पड़ा है. चीन को होने वाले जर्मन निर्यात में 12 प्रतिशत से ज्यादा की भारी गिरावट आई है. इसके बावजूद, अमेरिका अभी भी जर्मनी के लिए कमाई का सबसे बड़ा जरिया है क्योंकि वहां वह चीन के मुकाबले कहीं ज्यादा सामान बेचता है.
भारत दौरे पर अफगानिस्तान के उद्योग और वाणिज्य मंत्री
अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अल्हाज नूरुद्दीन अजीजी द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए बुधवार को भारत पहुंचे. अफगान वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अजीजी भारतीय वाणिज्य और विदेश मंत्रियों के साथ-साथ व्यापारियों और निवेशकों से मुलाकात करेंगे.
बयान के मुताबिक, "इन बैठकों का उद्देश्य आर्थिक सहयोग का विस्तार करना, व्यापारिक संबंधों को सुगम बनाना, संयुक्त निवेश के अवसर पैदा करना और क्षेत्रीय ट्रांजिट मार्गों में अफगानिस्तान की भूमिका को मजबूत करना है."
बदल रही है दक्षिण एशियाई राजनीति की हवा
अजीजी के भारत पहुंचने की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने लिखा, "द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाना इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है."
भारत ने पिछले महीने काबुल में अपना दूतावास फिर से खोला था, जो 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद बंद कर दिया गया था. नई दिल्ली अफगानिस्तान को सहायता बढ़ा रहा है और ईरान के चाबहार बंदरगाह के जरिए व्यापार को प्रोत्साहित कर रहा है. हाल ही में अमेरिका ने भारत को चाबहार संचालन के लिए छह महीने की प्रतिबंध छूट दी है, जिससे अफगानिस्तान की पाकिस्तान पर निर्भरता कम हो रही है.
यूक्रेन रूस युद्ध रोकने का अमेरिकी प्लान: जमीन के बदले मिलेगी सुरक्षा?
समाचार एजेंसी रॉयटर्स और एएफपी के मुताबिक, अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक नया युद्धविराम प्रस्ताव तैयार किया है. इस योजना के तहत यूक्रेन को ना केवल रूसी कब्जे वाले इलाकों को छोड़ना पड़ सकता है, बल्कि अपनी सेना में भी भारी कटौती करनी होगी. सूत्रों का कहना है कि अमेरिका चाहता है कि यूक्रेन इस शांति समझौते की मुख्य शर्तों को स्वीकार कर ले. खबरों के अनुसार, अगर कीव पूर्वी यूक्रेन का कुछ हिस्सा रूस को सौंप देता है, तो बदले में अमेरिका उसे और यूरोप को भविष्य में रूस के किसी भी हमले से सुरक्षा की गारंटी देगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर इस 28 पॉइंटर वाली योजना को मंजूरी दे दी है. हालांकि व्हाइट हाउस ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया पर कहा कि एक स्थायी शांति के लिए दोनों पक्षों को कुछ "मुश्किल लेकिन जरूरी समझौते" करने होंगे. उन्होंने कहा कि अमेरिका युद्ध को खत्म करने के लिए दोनों पक्षों की राय के आधार पर व्यावहारिक विचारों की सूची तैयार करना जारी रखेगा, क्योंकि इस जटिल युद्ध को खत्म करने के लिए गंभीर बातचीत की जरूरत है.
दूसरी ओर, रॉयटर्स को एक यूक्रेनी अधिकारी ने बताया कि इस प्रस्ताव को तैयार करने में कीव की कोई भागीदारी नहीं थी. राष्ट्रपति जेलेंस्की ने वॉशिंगटन की इस योजना पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के प्रभावी नेतृत्व की अपील की है. जेलेंस्की ने कहा कि केवल अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप के पास ही इतनी ताकत है कि वे वर्षों से चले आ रहे इस युद्ध का अंत करवा सकें.
ट्रंप ने किए बिल पर हस्ताक्षर, 30 दिनों में सार्वजनिक होंगी जेफ्री एपस्टीन की फाइलें
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार को उस बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके तहत जेफ्री एपस्टीन से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएंगे. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रथ सोशल' पर जानकारी दी, “मेरे निर्देश पर, न्याय विभाग ने पहले ही कांग्रेस को लगभग पचास हजार पृष्ठों के दस्तावेज सौंप दिए हैं.”
जनवरी में ट्रंप के दोबारा सत्ता संभालने के बाद से ही यह मुद्दा चर्चा में था और लोग लगातार इन फाइलों को जारी करने की मांग कर रहे थे. अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने पुष्टि की है कि न्याय विभाग अगले 30 दिनों के भीतर एपस्टीन से जुड़ी फाइलें आम जनता के लिए जारी कर देगा. मंगलवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट द्वारा पारित किए गए कानून में इस काम के लिए एक महीने की समय सीमा तय की गई है. बॉन्डी ने भरोसा दिलाया है कि प्रशासन कानून का पालन करेगा और इस मामले में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी.
दूसरी ओर, सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने कहा है कि यदि उन्हें लगा कि राष्ट्रपति ट्रंप पूरी जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं, तो उनकी पार्टी इसका कड़ा विरोध करेगी. शूमर ने जोर देकर कहा कि यह विधेयक राष्ट्रपति के लिए एक आदेश है कि वे अमेरिकी जनता के सामने पूरी ईमानदारी के साथ सच को रखें और कुछ भी ना छिपाएं.
अमेरिका ने भारत को 93 मिलियन डॉलर के हथियारों की बिक्री को दी मंजूरी
अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत को जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी गोला-बारूद की बिक्री को मंजूरी दे दी है. अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) के अनुसार, इस सौदे की कुल कीमत लगभग 93 मिलियन डॉलर है. यह कदम वॉशिंगटन के विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत भारत की पहली खरीद है, जो अगस्त में दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव के बाद हो रही है.
डीएससीए ने बयान में कहा कि यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को समर्थन देगी और भारत को इंडो-पैसिफिक और दक्षिण एशिया में स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार बनाए रखने में मदद करेगी. भारत ने 216 एक्सकैलिबर टैक्टिकल प्रोजेक्टाइल और 100 जेवलिन सिस्टम खरीदने का अनुरोध किया है. एक्सकैलिबर गोला-बारूद पहले से ही भारत की एम-777 हॉवित्जर तोपों में इस्तेमाल हो रहा है.
जेवलिन मिसाइल डील के मुख्य कॉन्ट्रैक्टर आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन जेवलिन जॉइंट वेंचर होंगे, जो ऑरलैंडो, फ्लोरिडा और टक्सन, एरिजोना में स्थित हैं. वहीं, एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल के लिए मुख्य कॉन्ट्रैक्टर अर्लिंग्टन की आरटीएक्स कॉर्पोरेशन होगी.
बिहार: 10वीं बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार
बिहार की राजनीति में आज ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार ने पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. यह उनका दसवां कार्यकाल है, जो राज्य की राजनीति में उनकी लंबी और स्थायी पकड़ को दर्शाता है. शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के शीर्ष नेता शामिल हुए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए.
एक दिन पहले, विधानसभा के केंद्रीय कक्ष में हुई बैठक में एनडीए के 202 विधायकों ने नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से अपना नेता चुना. इससे पहले, जेडीयू ने भी अलग बैठक कर नीतीश को अपने विधायक दल का नेता घोषित किया.













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