नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर देश की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल की एकीकृत आय चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसकी प्रमुख वजह इंटरनेट उपभोग और वसूली में वृद्धि होना रही। इससे कंपनी को अपना घाटा कम करने में भी मदद मिली है।
कंपनी ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि तिमाही के दौरान उसकी एकीकृत परिचालन आय सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 25,785 करोड़ रुपये रही। यह किसी भी तिमाही में अर्जित कंपनी की सबसे अधिक एकीकृत आय है।
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वित्त वर्ष 2020-21 की जुलाई-सितंबर अवधि में कंपनी का घाटा कम होकर 763 करोड़ रुपये रह गया। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कंपनी का घाटा 23,045 करोड़ रुपये रहा था।
हालांकि, पिछले साल कंपनी के ज्यादा घाटे की प्रमुख वजह उच्चतम न्यायालय के आदेश पर समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) से जुड़ा बकाया भुगतान के लिए 28,450 करोड़ रुपये का प्रावधान करना था।
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बयान के मुताबिक कंपनी के घरेलू कारोबार ने आय, मार्जिन और ग्राहकों की संख्या सभी पहलुओं पर मजबूत वृद्धि दर्ज की है।
सितंबर तिमाही में भारत से कंपनी की आय 22 प्रतिशत बढ़कर 18,747 करोड़ रुपये रही। इसकी प्रमुख वजह 4जी ग्राहकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होना है। वहीं, कंपनी की मोबाइल सेवा से आय 26 प्रतिशत बढ़ी।
दूरसंचार कंपनियों के लिए ‘प्रति उपयोक्ता औसत आय’ (एआरपीयू) गणना करने का सबसे मुख्य कारक है। समीक्षावधि में कंपनी का एआरपीयू 162 रुपये रहा जो पिछले साल समान तिमाही में 128 रुपये रहा था। जबकि इससे पिछली अप्रैल-जून तिमाही में यह 157 रुपये था।
कंपनी ने कहा कि उसके 4जी ग्राहकों की संख्या भी समीक्षावधि में सालाना आधार पर 48.1 प्रतिशत बढ़कर 15.27 करोड़ हो गयी। वहीं कंपनी की प्रति उपयोक्ता औसत इंटरनेट खपत 16 जीबी प्रति माह रही जो उद्योग में सबसे बेहतर स्थिति रही है। जबकि प्रति व्यक्ति औसत वॉयस कॉल उपयोग 1,005 मिनट प्रति माह रहा।
बयान में कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ)- भारत एवं दक्षिण एशिया गोपाल विट्टल ने कहा, ‘‘ आम तिमाहियों से कमजोर तिमाही रहने के बावजूद कंपनी की आय में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बेहतर प्रदर्शन है।’’
उन्होंने कहा कि कंपनी अपना लाभ बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
एजीआर के मुद्दे पर कंपनी ने कहा कि उसने सरकार के सामने अपनी बात रखी है और दूरसंचार विभाग द्वारा मांगे गए बकाये का 10 प्रतिशत से अधिक वह पहले भुगतान कर चुकी है। कंपनी न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करेगी।
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