बेंगलुरु, सात मार्च कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शुक्रवार को कहा कि बेंगलुरु सिटी यूनिवर्सिटी (बीसीयू) का नाम बदलकर डॉ. मनमोहन सिंह बेंगलुरु सिटी यूनिवर्सिटी रखा जाएगा।
विधानसभा में अपना 16वां बजट पेश करते हुए उन्होंने बीसीयू का नाम बदल कर पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत मनमोहन सिंह के नाम पर रखे जाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, ‘‘इसे देश का एक आदर्श विश्वविद्यालय बनाने के मकसद से राजकीय कला महाविद्यालय और राजकीय आर.सी. कॉलेज को इसका घटक महाविद्यालय बनाया जाएगा।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिक्काबल्लापुर जिले के चिंतामणि तालुक में 150 करोड़ रुपये की लागत से विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का एक घटक कॉलेज स्थापित किया जाएगा और मैसूरु विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नंजुंदास्वामी शोध पीठ की शुरुआत की जाएगी।
उनके अनुसार, विश्व बैंक की मदद से अगले चार वर्षों में प्रथम श्रेणी के महाविद्यालयों में बुनियादी सरंचना को मजबूत करने और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए ढाई हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि 26 करोड़ रुपये की लागत से 26 महिला उच्च शिक्षा संस्थानों को उन्नत किया जाएगा। पिछले साल मुख्यमंत्री ने कहा था कि 31 महिला संस्थानों को उन्नत किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी प्रथम श्रेणी महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग महाविद्यालयों और पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त दो हजार पदों को भरने के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राजकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालयों, पॉलिटेक्निक और स्नातक महाविद्यालयों में 275 करोड़ रुपये की लागत से आवश्यक बुनियादी संरचना उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि नए स्थापित पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेज को 10 करोड़ रुपये की लागत से फर्नीचर, उपकरण, कंप्यूटर और पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।
सिद्धरमैया ने कहा कि ‘चेवनिंग कर्नाटक मास्टर स्कालरशिप प्रोग्राम’ के तहत राज्य के सरकारी स्नातक महाविद्यालयों की छात्राओं को एक वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में भेजा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यावहारिक ज्ञान के माध्यम से छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए 16 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में पेशेवर विषय विशेषज्ञों को प्राध्यापक नियुक्त किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से अगले तीन वर्षों में कॉलेजिएट शिक्षा विभाग के सभी शिक्षकों को शिक्षण के लिए पुनर्रचना प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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