जरुरी जानकारी | दिवालिया पेशेवर समयबद्ध समाधान योजना पर काम करेंः आईबीबीआई

कोलकाता, 13 नवंबर भारतीय ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया बोर्ड (आईबीबीआई) का कहना है कि किसी मामले में नियुक्त दिवालिया पेशेवर को कर्ज निपटान की एक समय-सीमा ध्यान में रखते हुए समाधान योजना पर काम करना चाहिए।

आईबीबीआई के प्रभारी चेयरमैन नवरंग सैनी ने शनिवार को एक वेबिनार में शिरकत करते हुए कहा कि दिवालिया पेशेवर को पारदर्शिता दिखाने के साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कर्ज समाधान योजना को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जा सके।

बोर्ड के पूर्णकालिक सदस्य सैनी ने कहा, "एक तनावग्रस्त परिसंपत्ति का मूल्य हर गुजरते दिन के साथ कम होता जाता है। कुछ मामलों में ऐसा देखा गया है कि समाधान मूल्य उसके परिसमापन मूल्य के लगभग समान ही हो गया था।"

ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) में कर्ज समाधान योजना को 180 दिनों के भीतर पूरा करने का प्रावधान किया गया था। लेकिन सैनी ने कहा कि कुछ मामलों में तो यह समयसीमा 400 दिनों से भी ज्यादा हो चुकी है।

उन्होंने यह स्वीकार किया कि दिवालिया प्रक्रिया में कुछ खामियां अब भी बनी हुई हैं लेकिन समय के साथ उन्हें भी दूर कर लिया जाएगा।

सैनी ने कहा कि देश भर में इस समय करीब 3900 दिवालिया पेशेवर मौजूद हैं लेकिन उनमें से कई पेशेवरों को काम ही नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने इसके लिए कुछ चुनिंदा दिवालिया पेशेवरों के एकाधिकार स्थापित कर लेने को इसकी वजह बताई।

उन्होंने कहा कि आईबीबीआई हरेक दिवालिया पेशेवर को समान अवसर देने की कोशिश में है क्योंकि यह हितधारकों के हित में होगा।

सैनी के मुताबिक, दिवालिया पेशेवर कर्ज में फंसी कंपनी का एक तरह से मुख्य कार्यपालक अधिकारी हो जाता है और उसे कंपनी विधि न्यायाधिकरण एवं कर्जदाताओं के साथ तालमेल बिठाकर मामले का जल्द निपटारा करना होता है।

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