देश की खबरें | बैंक धोखाधड़ी: विशेष सीबीआई अदालत ने पांच को कारावास की सजा सुनाई, 22 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

नयी दिल्ली, आठ अगस्त बेंगलुरु की एक विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी मामले में पांच लोगों को अलग-अलग अवधि के कारावास की सजा सुनाई है और उन पर कुल 22 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है। एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

सीबीआई ने 10 साल पहले यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक शिकायत पर मामला दर्ज किया था, जिसे नेक्ससॉफ्ट इन्फोटेल लिमिटेड द्वारा ऋण अदायगी में चूक से 18.34 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

सीबीआई प्रवक्ता ने यहां एक बयान में कहा, “सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को 18.34 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में विभिन्न आरोपियों को एक साल से लेकर चार साल तक के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।”

अदालत ने पांचों आरोपियों पर 22 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना भी लगाया। उसने कंपनी नेक्ससॉफ्ट इन्फोटेल लिमिटेड पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया।

एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा, “मेसर्स नेक्ससॉफ्ट इन्फोटेल लिमिटेड के निदेशक जी. धनंजय रेड्डी को 10 करोड़ रुपये के जुर्माने के साथ चार साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है; के सत्यनारायण को 12 करोड़ रुपये के जुर्माने के साथ चार साल की साधारण कारावास की सजा होगी; उक्त निजी कंपनी की प्रबंध निदेशक जी. निर्मला को एक साल के साधारण कारावास के साथ एक लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा।”

उन्होंने कहा, “उक्त निजी कंपनी के निदेशक दिनेश कावूर को एक लाख रुपये के जुर्माने के साथ एक साल की साधारण कैद और यूबीआई, छावनी शाखा, बेंगलुरु के तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) राजेश कुमार माधव को 50,000 रुपये के जुर्माने के साथ एक साल की साधारण कैद की सजा होगी।”

आरोपी कंपनी ने दुबई स्थित कंपनी से सॉफ्टवेयर आयात करने और बेंगलुरु में एक अन्य निजी कंपनी से सॉफ्टवेयर खरीदने के लिए यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया से 16 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया था।

इस ऋण का लाभ उठाने के लिए, आरोपी ने 21.50 करोड़ रुपये के सॉफ्टवेयर पैकेज और बेंगलुरु के सदरमंगला गांव में एक एकड़ से अधिक की जमीन को सुरक्षा के रूप में दिए।

प्रवक्ता ने कहा, “यह आरोप लगाया गया कि उधारकर्ता कंपनी ने धन का दुरुपयोग किया, और खाते में कोई प्राथमिक सुरक्षा (निश्चित रकम) नहीं बनाई गई, जो किश्तों का भुगतान न करने के कारण अनियमित हो गई। 13.44 करोड़ रुपये (लगभग) की बकाया राशि के साथ खाता 30 जून 2011 से एनपीए (गैर निष्पादित परिसंपत्तियां) बन गया। इसके बाद यह बकाया राशि 30 अप्रैल, 2013 को बढ़कर 18.34 करोड़ रुपये (लगभग) हो गई, जो कि बैंक को नुकसान था।”

एजेंसी ने 30 दिसंबर, 2013 को आरोपपत्र दाखिल किया था।

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