देश की खबरें | अयोध्या: गंगा दशहरा पर राम मंदिर में ‘राजा राम’ और अन्य देव विग्रहों की प्राण-प्रतिष्ठा हुई

(तस्वीरों के साथ)

अयोध्या, पांच जून अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल पर भगवान राजा राम, देवी सीता, भाई लक्ष्मण,भरत शत्रुघ्न और राम भक्त हनुमान से सजे राम दरबार का पूरे विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा की गई।

इस अवसर पर राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में बने आठ मंदिरों में भी देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा की गई।

इस आयोजन के दौरान शहर में उत्सव का माहौल रहा मंदिर परिसर को और आसपास के इलाकों को रंगीन रोशनी और फूलों से सजाया गया था। पुजारी भजनों और विस्तृत अनुष्ठानों के बीच राजा राम की लगभग पांच फुट ऊंची सफेद संगमरमर से बने विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के लिए राम मंदिर की पहली मंजिल पर एकत्र हुए।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ यह अनुष्ठान इस मंदिर में आयोजित दूसरा प्रमुख प्राण-प्रतिष्ठा समारोह था। इससे पहले, 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में राम लला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी।

बृहस्पतिवार का यह समारोह ‘अभिजीत मुहूर्त’ के दौरान हुआ। हिंदू पंचांग में इसे सबसे शुभ घड़ियों में से एक माना जाता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामकथा हेलीपैड पर उतरने के बाद सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान बजरंगबली की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। हनुमानगढ़ी में पूजा के बाद वे राम जन्मभूमि मंदिर की ओर रवाना हुए।

एक बयान के मुताबिक राम मंदिर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने भगवान राम की विधिवत पूजा की और उनकी आरती उतारी। इस दौरान मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। मुख्यमंत्री ने भक्तों के साथ संवाद किया और उनका अभिवादन स्वीकार किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित राम दरबार में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हिस्सा लिया। इस समारोह में मां सीता के साथ सिंहासन पर विराजमान भगवान राम, उनके साथ खड़े भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के विग्रहों के साथ-साथ भगवान हनुमान के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुई।

मुख्यमंत्री ने श्रीरामलला मंदिर के मुख्य परिसर में स्थित अन्य मंदिरों में भी गये, जहां विभिन्न देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई।

मंदिर में राम दरबार के अलावा परिसर में बने जिन आठ मंदिरों में देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा की गई उनमें परकोटे के उत्तर-पूर्व (ईशान) कोने में भगवान शिव, दक्षिण-पूर्व (अग्नि) कोने में भगवान गणेश, दक्षिणी शाखा में भगवान हनुमान, दक्षिण-पश्चिम कोने में सूर्य देव, उत्तर-पश्चिम (वायव्य) कोने में देवी भगवती और उत्तरी शाखा में देवी अन्नपूर्णा शामिल हैं। इन सभी मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा समारोह वैदिक रीति से संपन्न हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री ने हिस्सा लिया।

पारंपरिक नागर शैली में निर्मित यह मंदिर 360 फुट लंबा, 235 फुट चौड़ा और 161 फुट ऊंचा है। 2.77 एकड़ में फैले इस तीन मंजिला ढांचे में 392 नक्काशीदार खंभे, 44 दरवाजे और हिंदू देवी-देवताओं की शानदार नक्काशीदार प्रतिमाएं हैं।

त्रिदिवसीय समारोह के अंतिम दिन प्रातः साढ़े छह बजे से आह्वानित देवताओं का यज्ञमंडप में पूजन प्रारम्भ हुआ जो दो घंटे चला। इसके पश्चात नौ बजे से हवन शुरू हुआ जो घंटे भर चला। बाद में केंद्रीयकृत व्यवस्था के अंतर्गत एक साथ सभी देवालयों में प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान प्रारंभ हुआ।

जयपुर में सफेद संगमरमर से ‘राम दरबार’ को बनाया गया है। इसमें लगभग पांच फुट ऊंची राम की प्रतिमा के अलावा, देवी सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान की मूर्तियां भी हैं। वर्ष 2020 में शुरू हुए मंदिर निर्माण के पूर्ण होने की दिशा में यह एक और अहम पड़ाव है।

प्रशासन द्वारा उद्घाटन समारोह के दौरान वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध और मंदिर ट्रस्ट द्वारा बृहस्पतिवार को पूर्वाह्न नौ बजे से अपराह्न तीन बजे के बीच आगंतुकों को मंदिर में प्रवेश के लिए पास जारी न करने का निर्णय, भक्तों को रोकने में विफल रहा, जिनमें से कई नेपाल से भी आए थे, जो अयोध्या में ‘‘राजा’’ के रूप में भगवान राम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा समारोह देखने आए थे।

नेपाल की राजधानी काठमांडू के गोगन प्रसाद ऐसे ही एक भक्त थे। प्रसाद ने कहा, ‘‘मैंने इस पल का लंबे समय से इंतजार किया है। मैं भगवान राम के दर्शन करने के अवसर के लिए एक साल से अधिक समय से प्रार्थना कर रहा था। अब वह इच्छा पूरी होगी।’’ प्रसाद भक्तों के एक बड़े समूह के साथ नेपाल से अयोध्या आए थे।

भक्तों में एक मुस्लिम महिला भी शामिल थी, जो पारंपरिक परिधान बुर्का पहनकर आई थी और भजन गा रही थी। वह मंदिर में प्रवेश के लिए प्रशासन की अनुमति का इंतजार कर रही थी।

श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी अनिल मिश्रा ने ‘पीटीआई-’ से बातचीत में कहा कि यह समारोह देश के विभिन्न हिस्सों से आए धार्मिक विद्वानों की भागीदारी में वैदिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुआ।

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