देश की खबरें | एवीजीसी कार्यबल ने इस उभरते क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय मिशन स्थापित करने का सुझाव दिया

नयी दिल्ली, 26 दिसंबर ‘एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक’ (एवीजीसी) शिक्षा को चिकित्सा एवं इंजीनियरिंग के समान लोकप्रिय बनाने के लिए, सरकार द्वारा गठित एक कार्यबल ने सुझाव दिया है कि वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं। साथ ही कार्यबल ने स्कूल स्तर पर प्रतिभा का दोहन करने का सुझाव दिया है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्रा की अध्यक्षता वाले एवीजीसी कार्यबल ने सरकार से क्षेत्र के एकीकृत प्रसार के लिए बजट परिव्यय के साथ एक राष्ट्रीय एवीजीसी-एक्सआर मिशन शुरु करने की भी सिफारिश की है। कार्यबल ने 'मेक इन इंडिया' की तर्ज पर 'क्रिएट इन इंडिया' अभियान शुरू करने की सिफारिश भी की है ताकि सामग्री (कंटेंट) निर्माण पर विशेष जोर दिया जा सके।

‘एक्सआर’ का संदर्भ ‘विस्तारित वास्तविकता’ से है जिसका उपयोग ऐसी प्रौद्योगिकियों का वर्णन करने के लिए किया जाता है जो भौतिक और डिजिटल दुनिया को मिला सकते हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल अपने बजट भाषण में एवीजीसी कार्यबल की घोषणा की थी ताकि एवीजीसी सेक्टर को बढ़ावा दिया जा सके जो सालाना 16 फीसदी की दर से बढ़ रहा है और तीन अरब अमेरिकी डॉलर के बाजार के रूप में उभर रहा है।

चंद्रा ने यहां संवाददाताओं से कहा, "एवीजीसी क्षेत्र अभी वैश्विक बाजार का करीब एक प्रतिशत है। भारत की हिस्सेदारी छह प्रतिशत तक बढ़ सकती है और इस क्षेत्र में अगले 10 साल में 20 लाख नौकरियां सृजित करने की क्षमता है।"

उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के बाद एवीजीसी एक उभरता क्षेत्र है।

कार्यबल ने पिछले हफ्ते सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

कार्यबल के संस्थापक एवं पुन्नरयुग आर्टिविजन के संस्थापक आशीष कुलकर्णी ने कहा कि कार्यबल की सिफारिशों के कार्यान्वयन से मेडिकल एवं इंजीनियरिंग की तर्ज पर एवीजीसी क्षेत्र में करियर के लिए एक समर्पित रुपरेखा तैयार हो सकती है।

चंद्रा ने कहा कि भारत एवीजीसी क्षेत्र में कौशल-आधारित गतिविधियों के लिए प्राथमिक केंद्र के रूप में उभर रहा है और कई हॉलीवुड स्टूडियो देश में ‘पोस्ट-प्रोडक्शन’ का काम कर रहे हैं।

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