गुवाहाटी, 18 जुलाई असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने शनिवार को देहिंग-पटकाई वन्यजीव अभयारण्य में कोयला के अवैध खनन की न्यायिक जांच के आदेश दिए।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, गुवाहाटी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ब्रजेन्द्र प्रसाद काटकी 2003 से हो रहे खनन संबंधी मामले की जांच करेंगे।
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इस मुद्दे को लेकर उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की गयी हैं।
न्यायमूर्ति काटकी तिनसुकिया जिले के बागजान में ऑयल इंडिया लिमिटेड के गैस कुएं की आग की घटना में राष्ट्रीय हरित अधिकरण की जांच का नेतृत्व कर रहे हैं। वह अभी पुलिस जवाबदेही आयोग के अध्यक्ष भी हैं।
मुख्यमंत्री ने छह जुलाई को राज्य के वन विभाग को निर्देश दिया था कि वह केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय के परामर्श से अभयारण्य को राष्ट्रीय उद्यान के रूप में उन्नत करने के लिए कदम उठाए।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की शाखा नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स द्वारा अभयारण्य के पास साल्की में अवैध कोयला खनन के खिलाफ व्यापक विरोध के बीच यह घोषणा की गयी है।
नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स ने मई में स्वीकार किया था कि यह खनन 2003 से चल रहा है। उसने दावा किया कि उसने 2003 में अपने पट्टे के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन असम सरकार ने लंबे समय तक इस पर कार्रवाई नहीं की।
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