विदेश की खबरें | अर्जेंटीना : तानाशाही युग की ‘मौत की उड़ान’ स्वदेश लौटी
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

‘शॉर्ट एससी.7 स्काईवैन’ में न तो कोई अति विशिष्ट व्यक्ति (वीआईपी) सवार था, न ही इससे कोई अहम सामान ले जाया जा रहा था। लेकिन, देश के लोगों के लिए इसका महत्व कुछ और ही है, यह विमान अर्जेंटीना के लोगों को 1976-1983 के सैन्य तानाशाही युग के क्रूर इतिहास की याद दिलाएगा।

अमेरिका में मिला यह विमान पहला ऐसा विमान है, जिसके अर्जेंटीना के जुंटा शासन द्वारा राजनीतिक बंदियों को आसमान से समुद्र या नदी में गिराकर मारने के लिए इस्तेमाल किए जाने की अदालत में पुष्टि हुई है।

अर्जेंटीना की सरकार इस विमान को ‘म्यूजियम ऑफ मेमोरी’ में रखेगी। ईएसएमए के नाम से जाना जाने वाला यह संग्रहालय उस स्थान पर बनाया गया है, जो कभी जुंटा शासन का सबसे कुख्यात हिरासत केंद्र हुआ करता था।

ईएसएमए में कई राजनीतिक बंदियों को रखा गया था, जिन्हें बाद में ‘मौत की उड़ान’ के जरिये गहरे समुद्र या नदी में जिंदा गिरा दिया जाता था।

अजुसेना विलाफ्लोर अमेरिका से अर्जेंटीना लौटे विमान के पीड़ितों में शामिल थीं, जिनका बेटा नेस्तोर अचानक लापता हो गया था और माना जाता है कि अर्जेंटीना में तानाशाही युग की शुरुआत के दौरान उसे ‘मौत की उड़ान’ से गिराकर मार डाला गया था।

बेटे के लापता होने के बाद विलाफ्लोर ने तानाशाही हुकूमत से गुमशुदा बच्चों के बारे में जानकारी देने की मांग करने के लिए ‘मदर्स ऑफ प्लाजा डि मेयो’ नाम के एक समूह की स्थापना की थी। बाद में विलाफ्लोर को भी हिरासत में लेकर उन्हें मार दिया गया था।

विलाफ्लोर की बेटी सेसिला डि विंसेटी ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा, “पीड़ित परिजनों के रूप में हमारे लिए बहुत जरूरी है कि यह विमान इतिहास का हिस्सा बने, क्योंकि यह और इसके जरिये गिराए गए लोगों के शव बताते हैं कि उस दौर में वास्तव में क्या हुआ था।”

‘शॉर्ट एससी.7 स्काईवैन’ की अर्जेंटीना वापसी इतालवी फोटोग्राफर जियानकार्लो सेरुओदो के प्रयासों से संभव हो पाई, जिन्होंने ‘मौत की उड़ान’ भरने वाले विमानों की तलाश में वर्षों गुजार दिए थे। फ्लोरिडा में इस विमान का इस्तेमाल डाक भेजने में किया जाता था। एरिजोना में हाल के समय में कुछ ‘स्काई डाइवर’ ने इस विमान के जरिये हवा से छलांग लगाने के रोमांच का अनुभव किया था।

सेरुओदो ने एक साक्षात्कार में कहा था, “इन विमानों को खोजना जरूरी है, क्योंकि ये नाजियों के भयानक ‘गैस चैंबर’ की तरह ही अहम थे, जिनका इस्तेमाल लोगों को मारने के लिए किया जाता था।”

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