अहमदाबाद, नौ मई रामनवमी पर गुजरात के आणंद जिले के खंभात शहर में हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच स्थानीय पुलिस से राज्य सीआईडी-अपराध, सीबीआई या किसी अन्य "स्वतंत्र एजेंसी" को स्थानांतरित करने का निर्देश देने के अनुरोध के साथ मुस्लिम सदस्यों के एक समूह ने सोमवार को गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
चार याचिकाकर्ताओं ने खुद को पिछले महीने खंभात में हुई सांप्रदायिक हिंसा का ‘‘पीड़ित" बताते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के शिकायतकर्ताओं द्वारा दर्ज करायी गई प्राथमिकी की जांच नहीं करने को लेकर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अदालत से निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया है।
याचिकाकर्ताओं के वकील आनंद याज्ञनिक ने कहा कि उन्होंने जनहानि (एक व्यक्ति की मौत) और संपत्तियों को हुए नुकसान के लिए पर्याप्त मुआवजे की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि हिंसा के दौरान, पांच दुकानों, एक इमारत और एक मकान में लूटपाट की गई जबकि एक दरगाह को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। उन्होंने अपनी अर्जी में कहा कि याचिकाकर्ताओं की निजी संपत्तियां संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त सम्पत्तियों में शामिल हैं।
हिंसा के बाद दो प्राथमिकी दर्ज की गईं। ये प्राथमिकी हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष की ओर से दर्ज करायी गई हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा दर्ज करायी गई प्राथमिकी में जांच अधिकारी द्वारा कोई प्रगति नहीं की गई है। याचिका में जांच में पक्षपात का आरोप लगाया गया है।
मामले की जांच खंभात पुलिस से राज्य सीआईडी-अपराध, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या किसी अन्य "स्वतंत्र एजेंसी" को सौंपने का अनुरोध करते हुए याचिका में कहा गया है, ‘‘जांच अधिकारी के इस तरह के व्यवहार से दुर्भावना, अनुचित व्यवहार और पूर्वाग्रह की बू आती है। उनकी कार्रवाई स्पष्ट रूप से मनमानी है और इसलिए धर्मनिरपेक्षता, कानून के समक्ष समानता और कानून के समान संरक्षण पर हमला करती है।’’
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