नयी दिल्ली, 23 मई दिल्ली और जी20 से संबंधित कार्यक्रमों की मेजबानी करने वाले अन्य शहरों में अतिक्रमण रोधी अभियान तेज हो गए हैं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इन अभियान के चलते कई लोग बेघर हो गए हैं।
सोमवार को यहां एक जनसुनवाई के दौरान नागरिक संस्थाओं और सामुदायिक सदस्यों ने बेदखली और अतिक्रमण रोधी अभियान को लेकर अपना पक्ष रखा। इस सुनवाई का आयोजन विविध क्षेत्रों के एक सामूहिक संगठन ‘कंसर्न्ड सिटीजन’ द्वारा किया गया था।
कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि सितंबर में सरकारों और राष्ट्र प्रमुखों की बैठक सहित जी20 के आठ कार्यक्रमों की मेजबानी करने के लिए दिल्ली तैयार है, ऐसे में विभिन्न अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ अभियानों की एक श्रृंखला के बीच लोगों को बेदखली नोटिस मिलने शुरू हो गए हैं।
‘लैंड कॉन्फ्लिक्ट वॉच’ के पृथ्वीराज ने कहा, “भारत को नवंबर में जी20 की अध्यक्षता मिली और अचानक से दिल्ली में लोगों को नोटिस मिलने शुरू हो गए।”
उन्होंने कहा कि हाल के अतिक्रमण विरोधी अभियानों में एक खास तरीका देखने को मिला है, जिसके तहत जिन इलाकों में गरीबों की आबादी अधिक है, वो ज्यादा निशाने पर रहे हैं।
पृथ्वीराज ने कहा, “मेहरौली में, बेदखली के 700 नोटिस दिए गए, जबकि 25 घरों को गिरा दिया गया। हालांकि, तुगलकाबाद में करीब 1500 नोटिस दिए गए और करीब 3000 घरों को गिरा दिया गया, क्योंकि यहां रहने वाले अपेक्षाकृत ज्यादा संवेदनशील थे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों जगहों पर अपेक्षाकृत अधिक संपन्न लोगों के घर या अपार्टमेंट छोड़ दिए गए।
‘हाउसिंग एंड लैंड राइट्स नेटवर्क’ (एचएलआरएन) की 2021 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सरकारी अधिकारियों ने 36,480 से अधिक घरों को ध्वस्त कर दिया, जिससे शहरी और ग्रामीण भारत में 2,07,100 (2.07 लाख) से अधिक लोग अपने घरों से बेदखल हो गए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश भर में राज्य के अधिकारियों ने 2022 में जनवरी से जुलाई तक 25,800 से अधिक घरों को ध्वस्त कर दिया, जिससे कम से कम 124,450 लोग प्रभावित हुए।
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