नयी दिल्ली, पांच फरवरी राजनीतिक दलों द्वारा वित्तीय सहायता की घोषणाओं को ‘केवल चुनावी वादे’ बताते हुए दिल्ली की महिलाओं के एक वर्ग ने कहा कि उन्होंने बेहतर शिक्षा और सुरक्षा के लिए वोट दिया है।
दिलशाद गार्डन में एक महिला मतदाता ने कहा कि वित्तीय सहायता की घोषणा महज चुनावी वादा है।
उसने कहा, ‘‘ हमें इसकी जरूरत नहीं है... हमें वो चाहिए जो आम जनता की जिंदगी को बेहतर बनाए। मैं आठ साल से सरकारी स्कूल में अनुबंधित अध्यापिका के तौर पर काम कर रही हूं। मैं चाहती हूं कि सरकार मेरी नौकरी को स्थायी कर दे।’’
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस ने महिलाओं को वित्तीय सहायता देने का वादा किया है। दिल्ली के मतदाताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 46.2 प्रतिशत है। राष्ट्रीय राजधानी में 72.36 लाख महिला मतदाता हैं।
भाजपा ने चुनाव जीतने पर सभी महिलाओं को 2,500 रुपये प्रति माह की दर से वित्तीय सहायता देने का वादा किया है, जबकि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने ‘महिला सम्मान योजना’ के तहत 2,100 रुपये प्रति माह देने का वादा किया है। कांग्रेस ने ‘प्यारी दीदी योजना’ के तहत हर महिला को 2,500 रुपये प्रति माह देने की घोषणा की है जो उसके द्वारा शासित अन्य राज्यों में लागू की गई पहलों के समान है।
गोल मार्केट निवासी मधु ने कहा, ‘‘हर कोई वोट खरीदने की कोशिश कर रहा है। एक पार्टी द्वारा महिलाओं के लिए मासिक भत्ता घोषित किये जाने के बाद, सभी अन्य पार्टियों ने भी ऐसा ही किया। उन्होंने पहले ऐसा क्यों नहीं किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने फर्जी भत्तों के लिए नहीं बल्कि विकास और भावी पीढ़ी के लिए बेहतर अवसरों के लिए वोट दिया।’’
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली की 35 वर्षीय मतदाता प्रिया शर्मा ने कहा कि एक महिला के तौर पर वह ऐसी सरकार चाहती हैं जो उनकी जरूरतों को सही मायने में समझे और उनका समाधान करे।
ओखला निवासी आयशा खान (27) ने चुनाव को ऐसी सरकार चुनने का मौका बताया जो महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सुरक्षा का समर्थन करेगी।
खान ने इस बात पर जोर दिया कि पार्टियां जानती हैं कि महिलाओं के मत का महत्व है। उन्होंने कहा कि वह ऐसी सरकार की अपेक्षा करती हैं जो मासिक भत्ते या मुफ्त बस यात्रा के वादों के साथ महिलाओं का इस्तेमाल सिर्फ चुनावों के लिए न करे।
दिल्ली के उत्तर-पूर्व और पूर्वी क्षेत्र की महिला मतदाताओं ने कहा कि मासिक भत्ते के चुनाव-पूर्व वादे उनके लिए मुद्दा नहीं है।
बाबरपुर में रहने वाली गृहिणी शाजिया ने कहा कि रोजगार एक बड़ा मुद्दा है।
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