अमरावती, 19 जुलाई आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर मुस्लिम समुदाय की चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए बुधवार को कहा कि उनकी सरकार ऐसा कोई निर्णय नहीं लेगी जिससे अल्पसंख्यकों की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
रेड्डी ने समुदाय के प्रतिनिधियों के एक समूह को यह आश्वासन दिया, जिन्होंने यहां यूसीसी पर अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए उनसे मुलाकात की थी।
रेड्डी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “ यह आपकी सरकार है जो कमजोर वर्गों और अल्पसंख्यकों के हितों के लिए काम कर रही है और वह ऐसा कोई निर्णय नहीं लेगी जिससे आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचे। इसके बारे में अनावश्यक रूप से चिंतित न हों।”
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर सिर्फ मीडिया ही बात कर रही है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, केंद्र ने अब तक यूसीसी को लेकर मसौदा विधेयक तैयार नहीं किया है और इसकी सामग्री के बारे में किसी को भी जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को लेकर गलत प्रचार किया जा रहा है।
रेड्डी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और उन्होंने प्रतिनिधियों से सुझाव देने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ऐसा देश है जो विविधता में एकता का समर्थक है जहां विभिन्न धर्म और समुदायों के लोग विविध परंपरराएं और रीति-रिवाजों का पालन करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न पर्सनल लॉ बोर्ड अपनी आस्था और धार्मिक प्रथाओं के आधार पर काम कर रहे हैं। रेड्डी ने कहा कि अगर इन प्रथाओं को सुव्यवस्थित करना है तो यह काम पर्सनल लॉ बोर्ड के माध्यम से किया जाना चाहिए।
रेड्डी ने कहा, “ अगर इन्हें बदलना है तो उच्चतम न्यायालय , विधि आयोग और केंद्र सरकार को मिलकर विभिन्न (पर्सनल) लॉ बोर्ड के साथ मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए और प्रस्तावित बदलावों पर काम करना चाहिए। अन्यथा, यह भारत जैसे देश में कारगर नहीं होगा, जहां विविधता है।”
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