चंडीगढ़, 14 सितंबर जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में कर्नल मनप्रीत सिंह और मेजर आशीष धोनैक की शहादत की जानकारी के बाद बृहस्पतिवार को उनके घरों पर बड़ी संख्या में लोग परिजनों को ढांढस बंधाने के लिए पहुंचे।
घर के बाहर जुटी भीड़ में से कुछ लोगों ने आक्रोशित स्वर में कहा कि सेना को इस कायरना हरकत के लिए आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए।
बृहस्पतिवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण सिंह (मोहाली के मुल्लांपुर) और धोनैक (पानीपत) के घर पहुंचे।
शहीद हुए सेना के दोनों जवानों के परिवार गमगीन है।
इस बीच अधिकारियों ने बताया कि शहीद सैन्य अधिकारियों के पार्थिव शरीरों को श्रीनगर के सैन्य अस्पताल लाया जा चुका है।
दोनों शहीद सैन्य अधिकारियों के परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनके पार्थिव शरीर शाम या कल (शुक्रवार) सुबह तक लाए जाने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि पंचकूला जिले में एक स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत सिंह की पत्नी को बृहस्पतिवार सुबह उनके पति के निधन की सूचना दी गई। इससे पहले उन्हें बुधवार को बताया गया था कि उनके पति (सिंह) गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
सिंह के परिवार में उनकी दो साल की बेटी और एक छह साल का बेटा है।
वहीं धोनैक के परिवार में उनकी पत्नी, दो साल की बेटी और तीन बहनें हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के उनके समकक्ष मनोहर लाल खट्टर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
इस गमगीन माहौल में परिजनों के समक्ष शोक व्यक्त करने पहुंचे लोगों ने कहा कि सेना को आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए।
धोनैक के पड़ोस में रहने वाले एक बुजुर्ग ने पानीपत में संवाददाताओं से कहा, ''हम सभी जानते हैं कि पाकिस्तान ने छद्म युद्ध छेड़ रखा है। हमारी सेना को ऐसा मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए कि किसी भी मां को अपने बेटे, किसी भी बहन को अपने भाई, किसी पत्नी को अपने पति और किसी बच्चे को अपने पिता को खोने का ऐसा गम न झेलना पड़े।''
मुल्लांपुर में सिंह की मां मंजीत कौर ने दर्दभरी आवाज में बताया, ''सरकार को आतंकवादियों का नामोनिशान मिटा देना चाहिए। सरकार को अब कठोर फैसला लेने की जरूरत है। मेरा कर्नल, मेरा बेटा शहीद हुआ है।''
कौर ने बताया कि उन्होंने रविवार को दोपहर में ही अपने बेटे से बात की थी और उसने उन्हें बताया था कि वह जल्द घर आएगा। उन्होंने बताया कि उसकी (सिंह) उम्र करीब 40 वर्ष थी और उसके पिता के बाद अब उन्होंने उसे (सिंह को) भी खो दिया। सेना में रह चुके सिंह के पिता का 2014 में देहांत हो गया था।
सिंह की बहन ने बताया कि उन्होंने हाल ही में रक्षा बंधन पर अपने भाई से बात की थी।
आंखों से लगातार बहते आंसुओं के साथ उन्होंने कहा कि मौजूदा तैनाती वाली जगह पर उनका कार्यकाल बस कुछ ही महीने का बचा था।
मनप्रीत सिंह के चाचा हरमेल सिंह ने बताया कि उनका भतीजा हमेशा से सेना में शामिल होना चाहता था।
उन्होंने बताया, ''देश के लिए उसकी शहादत पर हमें गर्व है। वह एक बहादुर अधिकारी था। इससे पहले एक मुठभेड़ में उसने दो आतंकवादियों को ढेर किया था।''
शहीद कर्नल के भाई संदीप ने बताया कि मनप्रीत, जनवरी में एक सप्ताह के लिए घर आए थे।
उन्होंने बताया कि मनप्रीत ने कहा था कि वह दिसंबर में फिर घर आएगा।
धोनैक का परिवार पानीपत के सेक्टर सात में रहता है जबकि उनका पैतृक गांव बिंझोल है। उनके परिजनों ने बताया कि वह अगले महीने घर आने वाले थे।
सिंह के ससुराल पक्ष के लोग हरियाणा के पंचकूला के सेक्टर 26 में रहते हैं। उनकी पत्नी के भाई ने संवाददाताओं को बताया कि इस घटना की खबर उन्हें बुधवार शाम को ही मिल गई थी । लेकिन उन्होंने अपनी बहन को इस दुखद खबर की जानकारी बृहस्पतिवार को सुबह ही दी।
सिंह की दो साल की बेटी को गोद में लिए उनके ससुर जगदेव ने संवाददाताओं को बताया कि उन्हें पिछले साल ही सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।
सिंह के चाचा ने संवाददाताओं से बातचीत में अपने भतीजे की यादें साझा करते हुए कहा कि बचपन से ही उसमें कुछ कर गुजरने का जज्बा था और वह हमेशा मुस्कराते हुए दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता था।
शहीद कर्नल के एक अन्य रिश्तेदार ने बताया कि उन्होंने बुधवार सुबह ही उससे बात की थी लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनके बीच यह आखिरी बातचीत होगी।
धोनैक के रिश्तेदारों ने पानीपत में संवाददाताओं को बताया कि उसने देश की खातिर अपने प्राणों की आहूति दी है।
उनके भाई अंशुमन ने बताया कि वह भाग्यशाली हैं कि उन्हें उनके (आशीष) जैसा बड़ा भाई मिला।
आशीष को अक्टूबर में पानीपत के अपने नए घर में शिफ्ट होना था। फिलहाल किराये पर रह रहे परिवार ने हाल ही में मकान बनवाया है।
घाटी के कोकेरनाग इलाके में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में कर्नल और मेजर सहित सेना के तीन जवान व जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक उपाधीक्षक शहीद हो गए थे।
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