विदेश की खबरें | अमेरिकी हिंदू निकाय ने अमेरिकी संसद से इल्हान उमर के प्रस्ताव को खारिज करने का अनुरोध किया

वाशिंगटन, 24 जून अमेरिका स्थित एक हिंदू निकाय ने शुक्रवार को अमेरिकी संसद से इस सप्ताह महिला सांसद इल्हान उमर द्वारा पेश किए गए “हिंदूफोबिक” (हिंदुओं से भय वाले) प्रस्ताव को खारिज करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह “अनुचित और बेईमानीपूर्वक” भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड की निंदा करता है।

सांसद रशीदा तालिब और जुआन वर्गास द्वारा सह-प्रायोजित, प्रस्ताव में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन से अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) की सिफारिशों पर कार्रवाई करने और अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत भारत को विशेष चिंता वाला देश (सीपीसी) घोषित करने की मांग की।

यूएससीआईआरएफ की सिफारिशें विदेश विभाग के लिए बाध्यकारी नहीं हैं और पिछले कई वर्षों से लगातार अमेरिकी प्रशासन ने ऐसी सिफारिशों की अनदेखी की है।

‘हिंदूपैक्ट’ के कार्यकारी निदेशक उत्सव चक्रवर्ती ने कहा, “सदन के प्रस्ताव 1196 के साथ, महिला सांसद इल्हान उमर स्पष्ट रूप से जमात-ए-इस्लामी और मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े समूहों की बात कर रही हैं। एक निर्वाचित प्रतिनिधि, जिसने अमेरिका के संविधान के प्रति वफादारी की शपथ ली है, के द्वारा ऐसा किये जाते देखना बेहद दुखद है।”

हिंदूपैक्ट ने कहा कि उमर मिनेसोटा की एक राजनीतिक रूप से विवादास्पद डेमोक्रेटिक महिला सांसद हैं, जिन्हें अतीत में उनकी यहूदी विरोधी टिप्पणियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा झेलनी पड़ी थी।

उसने कहा, “यह पहली बार नहीं है - न ही यह आखिरी बार होगा - वह पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों का प्रदर्शन करते हुए अपने हिंदू विरोधी और भारत विरोधी पूर्वाग्रह दिखाती हैं। अप्रैल में उमर ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ फोटो खिंचवाने के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का दौरा किया था।”

संस्था ने एक बयान में कहा कि उसी महीने अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर संयुक्त राज्य आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने एक पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट जारी की। उसने कहा कि उमर ने अपने दुर्भावनापूर्ण प्रस्ताव में इस पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट का व्यापक संदर्भ दिया है।

इससे पहले, अमेरिकी सांसद इल्हान अब्दुल्ला उमर ने अप्रैल में पाकिस्तान की यात्रा की थी और पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान सहित देश के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) भी गईं थीं। इस यात्रा के मकसद, प्रकृति और इसके वित्त पोषण का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

भारत ने उमर की पीओके यात्रा की निंदा करते हुए कहा था कि इस क्षेत्र की उनकी यात्रा ने देश की संप्रभुता का उल्लंघन किया है और यह उनकी ‘‘संकीर्ण मानसिकता’’ वाली राजनीति को दर्शाता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था, ‘‘ अगर कोई अपने देश में ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाली राजनीति करता है, तो उससे हमें कोई मतलब नहीं है। किन्तु अगर कोई इस क्रम में हमारी क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुता का उल्लंघन होता है, यह हमसे जुड़ा मामला बन जाता है। यह यात्रा निंदनीय है।’’

चक्रवर्ती ने अप्रैल में उल्लेख किया था कि इस वर्ष की यूएससीआईआरएफ रिपोर्ट “पिछले वर्षों में सामने आई रिपोर्टों के एक पैटर्न का अनुसरण करती है। संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और कश्मीर जैसे विषयों पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर, यूएससीआईआरएफ रिपोर्ट में कट्टरपंथी इस्लाम से जुड़े समूहों जैसे ‘जस्टिस फॉर ऑल’ के साथ काम कर रहे इस्लामी संगठनों द्वारा फैलाई गई बातों को महज हूबहू रख दिया गया है, जबकि यूएससीआईआरएफ के आयुक्त ऐसे इस्लामी समूहों के मंच पर नियमित रूप से नजर आते हैं।”

वर्ल्ड हिंदू काउंसिल ऑफ अमेरिका (वीएचपीए) के अध्यक्ष और हिंदूपैक्ट के संयोजक अजय शाह ने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में भू-राजनीतिक स्थिति के एक सामान्य पर्यवेक्षक के लिए भी, यह स्पष्ट है कि इस प्रस्ताव के बहुत गहरे भयावह इरादे हैं।

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