किम यो जोंग के बयान से संकेत मिलता है कि उत्तर कोरिया बातचीत की मेज पर तभी लौटेगा, जब अमेरिका उसे अपनी परमाणु क्षमता के आंशिक समर्पण के लिए पुरस्कृत करेगा। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक उपलब्धि हासिल करने के लिए उत्तर कोरिया के साथ बातचीत का प्रयास कर सकते हैं।
ट्रंप ने हाल ही में किम जोंग उन के साथ अपने निजी संबंधों का बखान किया था और उनके साथ परमाणु कूटनीति को फिर से शुरू करने की उम्मीद जताई थी।
ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान 2018-19 में अमेरीका की कूटनीति तब विफल हो गई थी, जब उन्होंने किम का आह्वान ठुकरा दिया था।
किम ने अपने मुख्य परमाणु परिसर को नष्ट करने के बदले में प्रतिबंधों में व्यापक राहत देने की मांग की थी, जो एक सीमित परमाणु निरस्त्रीकरण कदम था। तब से किम ने अपने परमाणु शस्त्रागार को आधुनिक और विस्तारित करने के लिए कई हथियार परीक्षण किए हैं।
किम की बहन ने कहा कि उनके भाई और ट्रंप के बीच संबंध “खराब नहीं हैं।”
हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर उनके भाई और ट्रंप के बीच के व्यक्तिगत संबंधों से उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण का उद्देश्य पूरा होने की उम्मीद की जा रही है, तो उत्तर कोरिया की नजरों में यह ‘‘सिर्फ एक मजाक’’ भर है।
सरकारी मीडिया की ओर से जारी बयान में किम यो जोंग ने कहा कि किम-ट्रंप कूटनीति के पहले दौर के बाद से उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई है और उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र मानने से इनकार करने के किसी भी प्रयास को खारिज कर दिया जाएगा।
उत्तर कोरिया संभवतः आंशिक परमाणु निरस्त्रीकरण पर बातचीत चाहता है।
किम यो जोंग ने कहा कि वह एक अमेरिकी अधिकारी की कथित टिप्पणी का जवाब दे रही हैं, जिसमें कहा गया है कि ट्रंप परमाणु निरस्त्रीकरण पर बातचीत के लिए तैयार हैं।
वह परोक्ष तौर पर योनहाप समाचार एजेंसी के शनिवार के लेख का हवाला दे रही थीं, जिसमें व्हाइट हाउस के एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि ट्रंप “उत्तर कोरिया को पूरी तरह से परमाणु मुक्त बनाने के लिए किम के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं।”
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