नयी दिल्ली, 28 जुलाई अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बुधवार को कहा कि सभी लोगों को अपनी सरकार में राय देने का हक है और चाहे वे जो भी हों, उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि भारतीय और अमेरिकी मानवीय गरिमा, धार्मिक स्वतंत्रता सहित मौलिक स्वतंत्रताओं में यकीन रखते हैं।
यहां पहुंचने के बाद और भारतीय नेतृत्व के साथ बैठकों से पहले अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में नागरिक संस्थाओं के सदस्यों को संबोधित करते हुए, ब्लिंकन ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रतिबद्धता को साझा करते हैं और कहा कि यह प्रतिबद्धता द्विपक्षीय संबंधों के आधार का एक हिस्सा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि सफल लोकतांत्रिक देशों में ‘‘जीवंत” नागरिक संस्थाएं शामिल होती हैं और कहा कि लोकतंत्रों को, “अधिक खुला, ज्यादा समावेशी, ज्यादा लचीला और अधिक समतामूलक बनाने” के लिए उनकी जरूरत होती है।’’
कार्यक्रम के एक प्रतिभागी के मुताबिक, किसानों का प्रदर्शन, प्रेस की स्वतंत्रता, संशोधित नागरिकता अधिनियम(सीएए), अल्पसंख्यकों के अधिकार और चीन की आक्रमकता को लेकर चिंताएं तथा अफगानिस्तान की स्थिति उन मुद्दे में शामिल थे जो गोलमेज वार्ता ‘‘समतामूलक, समावेशी और सतत वृद्धि एवं विकास’’ के दौरान उठाये गये।
इसमें तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के एक प्रतिनिधि सहित नागरिक समाज के सात सदस्य शामिल हुए। प्रतिभागी ने बताया कि बातचीत के दौरान हर सदस्य ने भारत और क्षेत्र में चिंता के गंभीर मुद्दों पर संक्षिप्त रूप से अपनी बात रखी।
समझा जाता है कि ब्लिंकन ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ विस्तृत वार्ता के दौरान कुछ चिंताओं का जिक्र किया।
इंटर-फेथ फाउंडेशन के संस्थापक इफ्तिखार अहमद ने पीटीआई- को बताया कि उन्होंने अंतरधार्मिक सौहार्द्र के बारे में बात की, जो भारत और विश्व में प्रासंगिक है, तथा विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
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