गुवाहाटी, 11 सितंबर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को कहा कि पार्टी की विचारधारा से हटकर सभी दलों के विधायकों को राज्य में धार्मिक कट्टरपंथ को जड़ें जमाने से रोकने के लिए एकसाथ आना चाहिए। उन्होंने सभी विधायकों से ऐसी ‘नकारात्मक शक्तियों’ के उभरने से संबंधित मुद्दों को उचित चर्चा के लिए सदन में उठाने की अपील की।
मंगलादाई में राष्ट्रीय बजरंग दल के शिविर के दौरान कथित तौर पर हथियारों के प्रशिक्षण का मुद्दा एआईयूडीएफ विधायक अमीनुल इस्लाम द्वारा उठाये जाने पर अपने जवाब में शर्मा ने कहा कि पुलिस ने पहले ही इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है।
उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा कानूनी कार्रवाई की गयी, लेकिन प्रशिक्षण शिविर में आग्नेयास्त्र के इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास आग्नेयास्त्र के इस्तेमाल का कोई प्रमाण नहीं है। प्रशिक्षण में एयरगन का इस्तेमाल किया गया। यदि एआईयूडीएफ के पास कोई ऐसा सबूत है तो वह पुलिस को सौंप सकता है तथा उचित कार्रवाई की जाएगी।’’
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय बजरंग दल का भारतीय जनता पार्टी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से कोई नाता नहीं है तथा वह एक स्वतंत्र संगठन है।
शर्मा ने राज्य में अलकायदा द्वारा अपना नेटवर्क फैलाने की कोशिश किये जाने के मुद्दे की तरफ भी सदन का ध्यान खींचा।
उन्होंने कहा, ‘‘‘अलकायदा इन इंडियन सबकंटिनेंट’ की पांच टोलियों का पर्दाफाश किया गया है तथा इन गतिविधियों से संबद्ध चार बांग्लादेशी अब भी फरार हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सदन को साथ आना चाहिए तथा नकारात्मक शक्ति को धार्मिक कट्टरपंथ नहीं फैलाने देना चाहिए।’’
जुलाई में मंगलादाई शहर में एक विद्यालय में राष्ट्रीय बजरंग दल का शिविर आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें युवकों को कथित रूप से हथियारों का प्रशिक्षण देते देखा जा सकता है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY