लातेहार, चार सितंब झारखंड के लातेहार में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम में संशोधन और जंगलों पर अपने अधिकार की मांगों के साथ बुधवार शाम से टोरी जंक्शन में रेलवे लाइन पर धरने पर बैठे विशेष आदिवासी समूह के लोग ‘ताना भगत’ अभी भी अपने अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकाबंदी पर अड़े हुए हैं और उनसे बातचीत के जिला प्रशासन एवं जन प्रतिनिधियों के सभी प्रयास विफल हो गये हैं।
टोरी जंक्शन पर धरने पर बैठे ताना भगतों से झारखंड सरकार की ओर से वार्ता करने पहुंचे स्थानीय विधायक बैजनाथ राम की बातों को ताना भगतों ने मानने से इनकार कर दिया।
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ताना भगतों ने कहा,‘‘ मुख्यमंत्री स्वयं आकर हम सभी को आश्वस्त करें की हमारी मांगें पूरी की जायेंगी तभी हम यहाँ से हटेंगे।’’
स्थानीय विधायक से वार्ता के दौरान कई बार तीखें नोकझोंक भी हुई। लेकिन ताना भगत मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
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इससे पूर्व छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1947 की धारा (145) की दफा 81 ए के तहत ताना भगत समुदाय को मिलने वाले हक को लेकर बुधवार शाम सवा पांच बजे से रेलवे ट्रैक पर आंदोलन कर रहे ताना भगतों से शुक्रवार को किसी भी वरीय अधिकारी ने वार्ता नहीं की। पचास घण्टे से रेलवे ट्रैक पर आंदोलन कर रहे ताना भगत अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
इस बीच मुख्य विपक्षी भाजपा ने के महासचिव समीर उरांव नें रांची में कहा कि बीते 50 घन्टे से स्वतंत्रता सेनानी के वंशज ताना भगत इस कड़ाके की धूप में रेलवे लाइन पर बैठे हैं और राज्य सरकार कुछ नहीं कर पायी है जो बेहद शर्मनाक बात है। सरकार को अविलंब बातचीत करने के लिए राज्य के वरिष्ठ मंत्री और वरीय अधिकारियों को लगाकर आंदोलन को समाप्त करवाना चाहिए।
इस बीच पूरे प्रकरण में लातेहार जिले के उपायुक्त जिशान कमर ने पीटीआई- से कहा कि ताना भगतों के साथ जिला प्रशासन लगातार वार्ता कर रही है।
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