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एम्स-दिल्ली बहुत शोध कर रहा है, नोबेल पुरस्कार पाने की दृष्टि से कर रहा है काम: निदेशक श्रीनिवास

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक एम. श्रीनिवास ने कहा है कि अगर भारत को फिजियोलॉजी या मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाना है तो यह संभवत: एम्स-दिल्ली को मिलेगा और यह संस्थान ‘उस दृष्टिकोण पर काम कर रहा है.’

एम्स-दिल्ली बहुत शोध कर रहा है, नोबेल पुरस्कार पाने की दृष्टि से कर रहा है काम: निदेशक श्रीनिवास
Director M. Srinivas (img: tw)

नयी दिल्ली, 5 सितंबर : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक एम. श्रीनिवास ने कहा है कि अगर भारत को फिजियोलॉजी या मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाना है तो यह संभवत: एम्स-दिल्ली को मिलेगा और यह संस्थान ‘उस दृष्टिकोण पर काम कर रहा है.’ डा. श्रीनिवास ने कहा कि एम्स-दिल्ली ऐसी विभिन्न बीमारियों पर बहुत सारे शोध कर रहा है जो देश में विशेष रूप से मौजूद हैं और जिनका सामाजिक प्रभाव हो सकता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि देश के इस अग्रणी अस्पताल के डॉक्टरों को अनुसंधान की तुलना में मरीजों की देखभाल को अधिक समय देना पड़ता है.

भारत के प्रमुख अस्पताल और चिकित्सा संस्थान को वैश्विक मानचित्र पर लाने के लिए अपने दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए डॉ श्रीनिवास ने ‘पीटीआई संपादकों’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि ऐसी बीमारियों पर शोध करने से जो विशिष्ट रूप से भारत में मौजूद हैं, उन्हें समझने और उनका निदान करने के लिए नीतियों को आकार देने में मदद मिलेगी. यह भी पढ़ें : कोलकाता बलात्कार मामला: पीड़िता के बारे में सोशल मीडिया पर घटिया पोस्ट को लेकर सीबीआई से रिपोर्ट तलब

उन्होंने कहा, ‘‘अनुसंधान के क्षेत्र में हमने निश्चित तौर पर बढ़त हासिल की है. आपको यह समझना होगा कि अगर हम उन बीमारियों के लिए शोध नहीं करते हैं जो हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण और भौगोलिक रूप से विशिष्ट हैं, तो और कौन ऐसा करेगा.’’ डा. श्रीनिवास ने कहा कि चाहे वह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के जरिए हो या भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद या एम्स के माध्यम से हो, देश में स्वास्थ्य समस्याओं को देखना और यह पता लगाना है कि अनुसंधान क्षेत्र क्या हैं और क्या करने की आवश्यकता है, इस पर हमारा फोकस है. उन्होंने कहा, ‘‘व्यापक संदर्भ में, शोध के बारे में हम यह कह सकते हैं कि अगर भारत को फिजियोलॉजी या मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार मिलता है तो शायद यह एम्स-दिल्ली को मिलेगा. हम उस दृष्टि पर काम कर रहे हैं.’’

हालांकि, उन्होंने कहा कि विदेशों में उनके समकक्ष संस्थान विशेष रूप से अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं जबकि एम्स-दिल्ली को रोगियों की देखभाल और शिक्षण पर भी ध्यान देना पड़ता है. उन्होंने कहा, ‘‘हमारा समय मरीजों की देखभाल पर अधिक और एम्स-दिल्ली में अनुसंधान पर कम जाता है. जब हम एक मरीज को देखते हैं जिसे हमारी देखभाल की आवश्यकता है, हस्तक्षेप की आवश्यकता है और रोगी हमारे सामने मर रहा है तो जाहिर है कि हम रोगी को अधिक समय देंगे. अगर हमें नोबेल पुरस्कार हासिल करना है तो हमें पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करना होगा.’’

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 05, 2024 02:06 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).