नयी दिल्ली, 29 जुलाई अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने मंगलवार को पूर्व खिलाड़ियों, कोचों, रेफरी, मैच अधिकारियों और सहयोगी सदस्यों को चिकित्सा जरूरतों के लिए एकमुश्त अनुदान मुहैया करने हेतु ‘परोपकार कोष’ बनाने के अपने फैसले को फिर से दोहराया।
इस पहल के तहत आवेदनों का मूल्यांकन व्यक्तिगत आधार पर करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा।
एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे ने इस कोष में एक लाख रुपये का योगदान दिया।
राष्ट्रीय महासंघ द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल एक मानवीय कार्य है, जो भारतीय फुटबॉल की सेवा करने वालों के आजीवन योगदान को सम्मान देती है।
विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘ एआईएफएफ इस कोष में पांच लाख रुपये का योगदान देगा। अनुदान के नियम और शर्तें संबंधित समितियों द्वारा तय की जाएंगी।
एआईएफएफ ने यह भी कहा कि वह समय के साथ कोष को बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से रास्ते तलाशेगा, जिसमें चैरिटी(परमार्थ) मैचों का आयोजन और राजस्व तथा साझेदारी के अन्य संभावित स्रोतों से समर्थन जुटाना शामिल है।
चौबे ने कहा कि इस परोपकार कोष के अलावा एआईएफएफ ने अपने उन कर्मचारियों के लिए पेंशन कोष स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा, जिन्होंने 20 साल या उससे अधिक सेवा दी है और 60 वर्ष या उससे अधिक की आयु में संगठन से सेवानिवृत्त हुए हैं।
एआईएफएफ की वित्त समिति की मंगलवार को यहां बैठक हुई। इसमें उसने परोपकार और पेंशन कोष के लिए नये बैंक खाते खोलने को मंजूरी दी।
मेनला एथेनपा की अध्यक्षता वाली वित्त समिति ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के खातों की समीक्षा की और उन्हें ऑडिट के लिए भेज दिया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY