नयी दिल्ली, 14 अप्रैल स्थानीय शासन में बच्चों की भागीदारी बढ़ाने के लक्ष्य के मद्देनजर यूनिसेफ और केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह जानकारी बृहस्पतिवार को एक विज्ञप्ति में दी गई।
इसके मुताबिक, यूनिसेफ इंडिया के प्रतिनिधि युमासा किमुरा और पंचायती राज मंत्रालय के सचिव सुनील कुमार ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर किमुरा और कुमार ने दूरदृष्टि के साथ आपसी सहयोग के जरिए भारत के युवा और बाल अधिकार सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई।
बयान में कहा गया कि सतत विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) के मद्देनजर इस साझेदारी का उद्देश्य बालक व बालिका सभा बना कर ग्राम सभाओं में युवाओं और बच्चों को उनकी बात रखने का अवसर देना है।
मंत्रालय ने कहा कि बाल सभाओं का काम बच्चों की प्राथमिकता जानना और उन्हें ग्राम पंचायत की विकास योजनाओं में जगह दिलाना है। साथ ही इसके जरिए नीतियों, सामाजिक सुरक्षा संबंधी योजनाओं और कार्यक्रमों में बच्चों और किशोरों की जरूरतों और आकांक्षाओं को जगह और अहमियत देना सुनिश्चित करना है।
साझेदारी संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर के बाद सुनील कुमार कहा, ‘‘केवल केंद्र और राज्य सरकारों को ही नहीं बल्कि क्षेत्र के विशेषज्ञ, शैक्षणिक संस्थान, गैर सरकारी संगठन और पंचायत अर्थात पूरे समाज को एकजुट होना पड़ेगा। आज हमारे बीच यूनिसेफ का होना इसका प्रमाण है कि एसडीजी के स्थानीयकरण के लिए सभी को एकजुट होने, परस्पर सहयोग करने और प्रतिबद्धता पर अडिग रहने की आवश्यकता है। इस सहयोग के लिए हम यूनिसेफ का धन्यवाद करते हैं।’’
किमुरा ने कहा, “यूनिसेफ-एमओपीआर साझेदारी से ग्राम पंचायत के निर्णयों में बच्चों और युवाओं के विचारों को महत्व मिलना सुनश्चित होगा। लड़के और लड़कियां उनके जीवन को प्रभावित करने वाली नीतियों और उनके विकास की योजनाओं में भाग लेंगे। हमें विश्वास है कि इस मॉडल से पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, भागीदारी और सुरक्षा संबंधी बच्चों की आकांक्षाओं को गांव के एजेंडे में बुनियादी महत्व दिया जाएगा।’’
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